सिरसा। शहर में सेक्टर 21 व 22 बनाने के लिए 14 वर्ष पहले सरकार ने शहर के साथ लगते गांव खैरपुर, वैदवाला और नेजाडेला के किसानों से 350 एकड़ जमीन की खरीद की, लेकिन अब उन्हीं किसानों को ब्याज सहित राशि वापस देने और जमीन वापस लेने का नोटिस जारी किया गया है। इसके कारण किसानों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई। वहीं किसानों ने जमीन की रुकी हुई राशि दिए जाने की मांग को लेकर तहसीलदार के माध्यम मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा है।
सरकार ने जबरन ली थी जमीन, किसानों ने किया था आंदोलन
बुधवार को उपायुक्त कार्यालय में पहुंचे किसान भूपेंद्र सिंह वैदवाला, जसपाल सिंह और गुरचरण सिंह ने बताया कि हुड्डा सरकार की ओर से वर्ष 2008 में उनसे सरकार ने जमीन अधिग्रहण की थी। इसका उन्होंने विरोध करते हुए तीन माह तक आंदोलन भी किया था, लेकिन इसके बाद सरकार ने 50 लाख प्रति एकड़ के अनुसार उनको जमीन की राशि अदा कर दी और जमीन का अधिग्रहण कर लिया। जमीन की कीमत अधिक होने के कारण वह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। कोर्ट ने वर्ष 2018 में उनके हक में फैसला सुना दिया और सरकार को नोटिस जारी कर प्रति एकड़ के अनुसार डेढ़ करोड़ की राशि अदा करने का फैसला सुनाया, लेकिन सरकार ने जमीन वापस कर राशि वसूलने का नया कानून बना दिया।
इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट में गए और कोर्ट ने फिर से उनके हक में फैसला सुनाया और जमीन अधिग्रहण की शेष बची राशि अदा करने की तिथि तक जारी कर दी। लेकिन अभी तक उनकी कई किश्तों की राशि जारी नहीं हो पाई है। इसके बाद अब एलओ की तरफ से उन सभी किसानों को नोटिस जारी किया गया और ब्याज एक करोड़ 75 लाख की राशि अदा कर जमीन वापस लेने की बात कहीं है। अब किसानों ने तहसीलदार भुवनेश्वर कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। किसान भूपेंद्र सिंह, संदीप, स्वर्ण सिंह, मेजर सिंह, गुरविंद्र सिंह, गुरचरण सिंह, जसपाल सिंह, अमरजीत सिंह, जगरूप सिंह, तेजबीर सिंह ने कहा कि कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को मान उनकी शेष रही राशि दिलवाई जाए।
14 वर्षों से बंजर पड़ी है अधिगृहीत जमीन
किसानों ने कहा कि बाईपास रोड के साथ लगती 350 एकड़ जमीन 14 वर्ष पहले अधिग्रहण की गई थी। इसके बाद उसके खाली करवा लिया गया। इस जमीन में लगे बिजली और अन्य कनेक्शनों को भी कटवा दिया, लेकिन अब सरकार बंजर पड़ी जमीन उन्हें वापस देने की बात कह रही है, जोकि बिलकुल गलत है। वहीं उन्होंने कहा कि अगर उनके मांग को नहीं माना गया तो वह इसके खिलाफ आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।
200 किसानों से खरीदी गई थी जमीन
शहर के बाहरी क्षेत्र में ही सेक्टर 19 और 20 बनाया गया है। इसके बाद सेक्टर 21 व 22 बनाने के लिए 200 किसानों से जमीन को अधिग्रहण किया गया था। नोटिस जारी होने के बाद किसानों की चिंता भी पहले से काफी अधिक बढ़ गई है। वहीं किसान र्स्वण सिंह, अमरजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, सावा सिंह ने कहा कि उन्हें किस्तों के अनुसार राशि दी गई थी। इसके चलते उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जमीन की खरीदारी की है। अब उन्हें नोटिस जारी कर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है, जोकि बेहद गलते हैं। बाईपास रोड भी उसी जमीन के बीच में से निकला है। इसका एक करोड़ 72 लाख का मुआवजा दिया गया, लेकिन जब उनसे वह जमीन खरीदी गई तो उसका मोल केवल 50 लाख ही लगाया गया।