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ऐलनाबाद विधानसभा को रास नहीं आती सत्ता में भागीदारी, जनता चुनती है विपक्ष का प्रतिनिधि

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सिरसा। ऐलनाबाद विधानसभा का उपचुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। इनेलो, कांग्रेस और भाजपा-जजपा गठबंधन प्रत्याशी मुख्य दौड़ में शामिल है। लेकिन ऐलनाबाद का सियासी सफर रोचक रहा है और ऐलनाबाद को कभी भी सत्ता में भागीदारी रास नहीं आई। यही कारण है कि 55 वर्ष के सियासी सफर के दौरान एक-दो बार को छोड़कर हमेशा ऐलनाबाद विधानसभा की जनता से विपक्ष के नेता को ही अपना प्रतिनिधि चुना है। शायद यही कारण भी है कि ये एरिया विकास से दूर ही रहा। यहां के लोग सेम, सिंचाई और शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं भी झेल रहा है। खास बात ये है कि अभी तक भाजपा एक बार भी ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के लोगों में जगह नहीं बना पाई।
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वर्ष 1967 से लेकर अब तक ऐलनाबाद का 55 वर्ष का राजनीतिक सफर रहा है। इस दौरान वर्ष 1987 और 1991 को छोड़कर कभी भी ऐलनाबाद विधानसभा को सत्ता में भागीदारी नहीं मिली। वर्ष 1987 में ऐलनाबाद के विधायक निर्वाचित हुए भागीराम तत्कालीन चौधरी देवीलाल सरकार में राज्यमंत्री बने थे। हालांकि 1991 में ऐलनाबाद से कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए मनीराम केहरवाला हरको बैंक के चेयरमैन रहे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से 1970 और 2009 में चुनकर विधायक बनने वाले ओमप्रकाश चौटाला पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन जब-जब वे ऐलनाबाद से विधायक चुने गए, तब-तब वे विपक्ष में ही रहे। संवाद
जानिये....ऐलनाबाद विधानसभा का राजनीतिक सफरनामा
ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र हरियाणा गठन के बाद से ही वजूद में है। 1967 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस से प्रताप चौटाला ऐलनाबाद से पहले विधायक चुने गए। सरकार में उनको प्रतिनिधित्व नहीं मिला। 1968 में विशाल हरियाणा पार्टी से लालचंद खोड विधायक बने जबकि 1972 में कांग्रेस से बृजलाल गोदारा विधायक बने। गोदारा जब विधायक बने तो कांग्रेस की सरकार थी और चौधरी बंसीलाल मुख्यमंत्री। इसी प्रकार 1977 और 1982 में भागीराम विधायक रहे। 1977 से 1979 तक चौधरी देवीलाल मुख्यमंत्री थे। जबकि 1979 से 1982 तक कांग्रेस सरकार में भजनलाल मुख्यमंत्री रहे। 1987 में पहली बार ऐलनाबाद को सत्ता में भागीदारी मिल पाई। इस दौरान ऐलनाबाद से लोकदल की टिकट पर विधायक चुने गए भागीराम देवीलाल की सरकार में राज्यमंत्री बने। उसके बाद से अब तक लगातार ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र सत्ता से दूर ही रहा है। इसके बाद केवल एक बार ऐलनाबाद से विधायक रहे मनीराम केहरवाला 1991 में कांग्रेस से विधायक चुने गए और वे हरको बैंक के चेयरमैन रहे। 1996 में समता पार्टी से भागीराम चौथी बार विधायक चुने गए और उस समय बंसीलाल की हविपा की सरकार थी। वर्ष 2000 में भागीराम इनेलो से निर्वाचित हुए। 2005 में इनेलो से डॉ. सुशील इंदौरा विधायक चुनकर आए। 2005 से 2009 तक कांग्रेस की सरकार रही और भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएम रहे। 2009 के सामान्य चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला विधायक बने। लेकिन उचाना और ऐलनाबाद से एक साथ विधायक बनने के कारण उन्होंने ऐलनाबाद से इस्तीफा दे दिया। जनवरी 2010 में अभय सिंह चौटाला विधायक चुने गए। इसी प्रकार 2014 ओर 2019 में भी अभय सिंह विधायक चुनकर आए लेकिन इस दौरान 2014 से लेकर अब तक भाजपा की सरकार है।
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राजनीतिक रूप से बंजर जमीन को उपजाऊ बनाना भाजपा की चुनौती
ऐलनाबाद विधानसभा की राजनीतिक जमीन भाजपा के लिए हमेशा से ही बंजर रही है। अब भाजपा इस जमीन को उपजाऊ क्षेत्र में बदलना चाहता है। 1967 से अब तक 15 चुनाव में भाजपा को एक बार भी प्रतिनिधित्व यहां से नहीं मिला। भाजपा यहां 1982 से लगातार मेहनत कर रही है। हालांकि 2014 और 2019 में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया और 55 हजार से अधिक वोट भी हासिल किए। भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इस बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं।
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