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ड्रग फ्री सिरसा मुहिम : गुरुद्वारों और मंदिरों में गूंजेगा नशा मुक्ति का संदेश

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अधिकारियों की बैठक लेते उपायुक्त पार्थ गुप्ता। विज्ञप्ति - फोटो : Sirsa
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सिरसा। उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने वीरवार को अपने कार्यालय में ड्रग फ्री सिरसा मुहिम के तहत ऑडियो संदेश क्लिप लांच किया। मुहिम के तहत अब मंदिरों व गुरुद्वारों में नशा मुक्ति का संदेश दिया जाएगा। प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम को 6 बजे यह ऑडियो क्लिप चलाई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं का सहयोग बहुत जरूरी है। युवाओं को नशे से बचाने के लिए हर नागरिक को पूरी सजगता एवं जिम्मेदारी के साथ अपना दायित्व निभाना होगा। यह ऑडियो क्लिप सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को भिजवाई जाएगी। उपायुक्त ने सभी सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से आह्वान किया कि वे गुरुद्वारे, मंदिरों व अपने-अपने संस्थानों में इस संदेश को चलाएं ताकि हर नागरिक को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी मिले। इसके साथ ही नगर परिषद एवं नगर पालिकाओं की डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने वाले वाहनों पर भी यह क्लिप चलाई जाए, जिससे नशे के खिलाफ इस मुहिम का संदेश घर-घर तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि मुहिम के तहत हर माह के पहले शुक्रवार को हर कार्यालय में नशा मुक्त विषय पर शपथ दिलवाई जाती है। इसी कड़ी में 6 जनवरी को सभी कार्यालयों में नशा मुक्ति की शपथ दिलवाई जाएगी। इस अवसर पर सहायक आयुक्त (प्रशिक्षणाधीन) यश जालुका, जिला नगर आयुक्त डॉ. किरण सिंह, डीडीपीओ राजेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी नरेश बतरा मौजूद रहे।
11 जनवरी से होंगी ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं
ड्रग फ्री सिरसा मुहिम के तहत जिला विकास एवं पंचायत विभाग एवं खेल विभाग की ओर से 11 जनवरी को खंड रानियां, ओढां, नाथूसरी चोपटा व ऐलनाबाद में ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाएगी। संबंधित विभाग के अधिकारी और पंच सरपंच अधिक से अधिक युवाओं को इन खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
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चिह्नित गांवों से जुटाई जा रही नशे में लिप्त लोगों की जानकारी
मुहिम के तहत विभिन्न खंडों के 10 गांव चिह्नित किए गए हैं। इनमें झोपड़ा, शाह सतनाम पुरा, तिलोकेवाला, मौजगढ़, चकजालू, गोसाईंआना, सूबाखेड़ा, कमाल, जीवननगर व दारियावाला शामिल हैं। इन गांवों में सर्वे करवाकर नशे में लिप्त लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि इनके इलाज के लिए कारगर कदम उठाए जा सके। इसके साथ-साथ इन गांवों में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविर में मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों द्वारा नशे से दैनिक जीवन व स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर परिणामों के बारे में बताया जाएगा।
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