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डॉक्टरों की तीन घंटे रही हड़ताल, परेशान मरीज काटते रहे एक जगह से दूसरी जगह चक्कर

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नागरिक अस्पताल में जांच करवाने के लिए डॉक्टर का इंतजार करते मरीज। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। मांगों को लेकर सुबह नौ बजे से 12 बजे तक डॉक्टरों ने कलम छोड़ हड़ताल की। सीट पर डॉक्टर न मिलने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते कई मरीज डॉक्टर के वापस लौटने का इंतजार करते रहे तो कई मरीज बिना जांच करवाए ही वापस लौट गए। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं पर डॉक्टर तैनात रहे और मरीजों की जांच करते रहे। इस दौरान फिजिशियन, नेत्र जांच, दांत, हड्डी रोग विशेषज्ञ और अन्य कोई भी डॉक्टर सीट पर नहीं पाया।
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सुबह नौ बजे से मरीजों ने ओपीडी में जांच करवाने के लिए पर्ची कटवानी शुरू कर दी है। मरीजों को जांच करवाने के लिए कर्मचारियों ने ओपीडी नंबर पर भेज दिया। लेकिन ओपीडी के बाहर खड़े कर्मचारियों ने मरीजों को इंतजार करने के बात कह उन्हें बाहर रही रोक दिया। ऐसे में मरीज एक जगह से दूसरी जगह पर चक्कर काटते हुए नजर आए। ओपीडी में हर रोज एक हजार के लगभग मरीज जांच करवाने के लिए पहुंचते है। लेकिन शुक्रवार को मरीजों की संख्या कम रही। इनमें से कई मरीज इंतजार कर वापस लौट गए तो कई मरीज इंतजार करने के लिए बैंच पर बैठे हुए पाए। 12 बजे के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर ओपीडी में जांच करनी शुरू की तो मरीजों को राहत की सांस मिल सकी।
उधर
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के आह्वान पर चिकित्सकों ने शुक्रवार सुबह नौ से 12 बजे तक तीन घंटे कलम छोड़ हड़ताल की। नागरिक अस्पताल प्रांगण में टेंट लगाकर चिकित्सकों ने बैठक की। बाद में अपनी मांगों को लेकर सिविल सर्जन डॉ. मनीष बंसल को ज्ञापन सौंपा। हड़ताल में नागरिक अस्पताल के अलावा सब डिविजन अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी व ब्लॉकों में भी चिकित्सकों ने हड़ताल की।
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नागरिक अस्पताल में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. पंकज शर्मा, उपप्रधान डॉ. बशिमंद्र सिंह, डॉ. नवनीत सिंह, महासचिव डॉ. गुरविंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों डॉ. बुधराम, डॉ. राजेश चौधरी, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. दीपक कंबोज, डॉ. आरके दहिया, डॉ. श्वेता डूडी, डॉ. अनीषा व अन्य मौजूद रहे।
जिला प्रधान डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि स्टेट कमेटी के आह्वान पर तीन मांगों को लेकर प्रदेशभर में चिकित्सकों ने शुक्रवार सुबह पैन डाउन हड़ताल की। उन्होंने कहा कि पहली मांग में सरकार द्वारा एसएमओ की सीधे ही नियुक्ति का विरोध किया गया है। 15-20 साल के अनुभव के बाद एसएमओ पदोन्नत होते हैं, उन्हें व्यवहारिक ज्ञान होता है जबकि सरकार सीधी नियुक्त करेगी, इससे अनुभवहीन अधिकारी नियुक्त होंगे साथ ही मेडिकल आफिसरों का हक भी छीना जाएगा। दूसरी मांग में पीजी पॉलिसी को बेहतर बनाना है। नई पॉलिसी के तहत सरकार एचसीएमएस के तहत सर्विस करने वाले चिकित्सकों का कोटा खत्म कर उन्हें अतिरिक्त अंक दे रही है जबकि उनके लिए सीट रिजर्व रखी जानी चाहिए। पंजाब, राजस्थान में भी यही नीति है। तीसरी मांग स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स का कैडर तैयार किया जाए, जो स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं उनसे ओपीडी, ऑपरेशन, चिकित्सीय सेवाएं ही ली जाएं। जो प्रबंधन का काम देखते हैं, उन्हें प्रबंधन व अन्य सेवाओं से जोड़ा जाए। डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि हड़ताल का मुख्य लक्ष्य चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाना है।

मांगों को लेकर सिविल सर्जन डॉ. मनीष बांसल को मांग पत्र सौंपते डॉक्टर। - फोटो : Sirsa

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