सीडीएलयू में मतगणना के दौरान पहुंचे उपायुक्त अनीश यादव
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ऐलनाबाद उपचुनाव का परिणाम चौंकाने वाला कतई नहीं रहा। इस क्षेत्र के राजनीतिक सफर का इतिहास रहा है कि यहां की जनता ने हमेशा विपक्ष में बैठने का काम किया है। हालांकि इस बार मतदाताओं ने सत्ता में शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन इससे चूक गए। जीत-हार का कम अंतर रहा। हालांकि ये भी परंपरा कायम रही कि इस सीट पर ज्यादातर चौटाला गांव का दबदबा रहा है। जो अब भी कायम है। ऐलनाबाद के 55 वर्ष के सियासी सफर के दौरान जनता ने एक या दो बार को छोड़कर सरकार के विपक्ष में बैठने का काम किया है।
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एक बार चुनी सत्ता में सीधी भागीदारी
जनता ने केवल एक बार सत्ता में सीधी भागीदारी को चुना था। वर्ष 1987 में ऐलनाबाद से विधायक भागीराम तत्कालीन देवीलाल सरकार में राज्य मंत्री बने थे। इसके अलावा एक बार 1991 में ऐलनाबाद से कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए मनीराम केहरवाला हरको बैंक के चेयरमैन बने थे। इसके अलावा जब भी कोई विधायक बना, वो विपक्ष का ही रहा। ये परंपरा मंगलवार को भी आए चुनाव परिणाम में नहीं टूटी और ऐलनाबाद से इनेलो के नेता अभय सिंह चौटाला को अपना विधायक चुना।
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सीट पर चौटाला गांव का रहा हमेशा दबदबा
ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर ज्यादातर चौटाला गांव का ही दबदबा रहा है। 1970 और 2009 में ओमप्रकाश चौटाला यहां से विधायक रहे। 1967 में प्रताप सिंह चौटाला विधायक बने। वर्ष 1972 में बृजलाल गोदारा को जनता ने प्रतिनिधि चुना। इसके अलावा वर्ष 2010, 2014 और 2019 में अभय सिंह चौटाला यहां से विधायक रहे हैं। इस बार भी अभय सिंह चौटाला ही मैदान में थे।