कुंडली बॉर्डर पर पंजाबी गायकों को सम्मानित करते एसकेएम नेता।
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में हुए उपचुनाव के माध्यम से जनता ने भाजपा को चेतावनी दी है। सभी उपचुनाव में मतदाताओं ने भाजपा को हराकर उसके दंभ को तोड़ दिया है। अगर भाजपा अब भी अपनी नीतियों को जनता के हितों के अनुरूप नहीं बनाती है, तो उन्हें भविष्य में इस तरह के परिणाम लगातार भुगतने पड़ेंगे। एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल सिंह ने सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर कहा कि हरियाणा, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश में जहां-जहां किसान आंदोलन ने अपनी ताकत लगाकर मतदाताओं से किसान विरोधी नीतियों के लिए भाजपा को हराने का आग्रह किया था, वहां भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा।
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यह तो एक शुरुआत है
उन्होंने कहा कि यह तो शुरुआत है अगर अभी भी भाजपा नहीं मानी तो भविष्य में इसी तरह परिणाम भुगतने होंगे। एसकेएम ने कहा कि हम सीएम मनोहर लाल के उस बयान से पूरी तरह से सहमत हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि संवाद ही किसी भी आंदोलन और किसानों के संघर्ष का समाधान है। हालांकि यह भाजपा के पाखंड को दर्शाता है, जो प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने को तैयार नहीं है। बातचीत का अंतिम दौर 22 जनवरी को समाप्त हुआ था। इसके बाद सरकार ने वार्ता को फिर से शुरू करने से इनकार कर दिया है।
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पंजाबी कलाकारों ने गीतों के बांधा समां
कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को पंजाबी लोक कलाकार मनमोहन वारिस और कमल हीर ने अपनी कला का प्रदर्शन कर आंदोलनकारी किसानों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने हम जीतेंगे जरूर, जंग जारी रखना गीत की शानदार प्रस्तुति देकर किसानों का खूब हौसला बढ़ाया। एसकेएम ने कहा कि पंजाब और अन्य राज्यों के कलाकारों ने आंदोलन को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एसकेएम सम्मान और स्नेह के साथ इसकी सराहना करता है। वहीं दोनों गायकों ने कहा किसान आंदोलन अब शिखर पर है। किसानों की जायज मांगों को पूरा किया जाना चाहिए।