सिरसा। गुरुपर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद किसानों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। घोषणा होने के बाद भावदीन और डबवाली टोल प्लाजा पर किसान एकत्र हुए। किसानों ने एक दूसरे को लड्डू और फल वितरित कर एक दूसरे को बधाई दी। किसानों ने आंदोलन की बड़ी जीत बताई। वहीं किसानों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 700 किसानों को भी श्रद्धांजलि दी।
किसानों ने कहा कि अगर सरकार इन कृषि कानूनों को पहले ही वापस ले लेती तो उन किसानों की जान नहीं जाती। किसान बीते एक वर्ष से लगातार कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे है जिसके कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। वहीं किसानों का कहना है कि जब तक कानूनी तौर पर कृषि कानून वापस नहीं होते उनका आंदोलन जारी रहेगा और धरने जारी रहेंगे। इस दौरान किसानों ने एमएसपी गारंटी कानून बनाने, किसानों पर दर्ज हुए मामलों को रद्द करने, पराली और बिजली पर बने कानूनों को भी वापस लेने की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि जब तक संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती, धरने और आंदोलन जारी रहेंगे।
कृषि कानून रद्द की घोषणा आंदोलन की बड़ी जीत: भारूखेड़ा
हरियाणा किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने तीन कृषि कानूनों वापसी की घोषणा को किसानों और लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत बताया। इसकी बड़ी कीमत संयुक्त किसान मोर्चा ने 700 किसानों जान गंवाकर चुकाई है। भारूखेड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है तथा जिन किसानों के लिए सरकार ने कानून बनाने का दावा किया था वे किसान 357 दिन से विरोध कर रहे थे। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने, उनके परिवार के आश्रितों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा दिवंगत किसानों का दिल्ली में स्मारक बनाने की घोषणा करनी चाहिए।
15 लाख रुपये जैसा नहीं होना चाहिए जुमला: ओलख
गुरुनानक देव जयंती के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता लखविंद्र सिंह ओलख ने प्रधानमंत्री के इस ऐलान का स्वागत किया। वहीं दूसरी ओर किसान नेता का कहना है अगर प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों को वापिस लेने का फैसला लिया है तो यह कोई 15 लाख रुपये का जुमला नहीं होना चाहिए। अगर ऐलान किया है तो ये बयान सही होना चाहिए। नेता ने कहा कि अभी वो अपना धरना नहीं उठाएंगे, संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से बैठक रखी जाएगी। उसमें धरना उठाने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अभी तक इस जुमलेबाज सरकार पर भरोसा नहीं है। इसलिए फिलहाल अभी तक कोई भी बॉर्डर खाली नहीं किए जाएंगे और न ही पक्के मोर्चे उठाए जाएंगे।
किसानों में खुशी का माहौल
चढूनी ग्रुप के किसान नेता हरविंद्र सिंह थिंद ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से कृषि कानून रद्द करने की घोषणा करना आंदोलन की बड़ी जीत है। किसानों के आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा है। इससे किसानों में खुशी का माहौल भी है। सरकार के राजहठ के कारण किसी के बेटी और किसी के पिता की मौत इस आंदोलन में हुई है। जिससे कमी को कभी भी पूरा नहीं किया जा सकता। सिरसा के भी कई किसान इसमें जान गंवा चुके हैं।
सरकार की घोषणा का करते है स्वागत
चढ़नी ग्रुप के जिला प्रधान सिकंदर सिंह ने कहा कि करीब एक वर्ष तक चले किसान आंदोलन के आगे सरकार झुकी है। इससे सिद्ध होता है कि देश में अभी भी लोगों का राज है। लोगों की ओर से सरकार बनाई जाती है। ऐसे में उन्हीं लोगों पर सरकार की ओर से कानून थोपे जाते है तो यह गलत है। जोकि अब सिद्ध भी हो चुका है। यहीं घोषणा सरकार की ओर से एक वर्ष पहले की जाती तो किसानों का इतना लंबा संघर्ष नहीं करना पड़ता।
तीनों कृषि कानून वापस लेने का निर्णय सराहनीय
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के नेता पृथ्वी सिंह चाहर ने कृषि कानूनों को वापस लेने के निर्णय को सराहनीय करार दिया है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों किसान करीब एक साल से दिल्ली के बॉर्डरों पर बैठे हैं। गुरु पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेकर बहुत ही सराहनीय काम किया है।
जब तक अन्य मांगें पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा : रोशन सुचान
संयुक्त किसान मोर्चा के घटक अखिल भारतीय किसान सभा के जिला महासचिव रोशन सुचान ने प्रधानमंत्री के बयान को एक वर्ष से दिल्ली सरहदों पर संघर्ष कर रहे किसानों और मजदूरों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि लेकिन जब तक एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं मिलता और पराली अध्यादेश सहित बिजली बिल कानून रद्द नहीं होता और इस प्रकार आगामी सत्र में सभी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा
ऐलनाबाद। कृषि कानूनों को लेकर किसानों के लंबे समय से चल रहे विरोध के बीच शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संदेश में कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। जिस पर किसान नेताओं व किसानों में खुशी की लहर है। वहीं घोषणा के बाद अतिरिक्त अनाज मंडी में किसानों द्वारा एक बैठक का भी आयोजन किया गया।
किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह, ब्लॉक संयोजक सरबजीत सिंह सिद्ध, प्रकाश सिहाग, प्रसन्न खोसा, सुरेंद्र सिद्ध व किसान नेता उपस्थित रहे। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय सराहनीय है। हम प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। देश के किसानों की सामूहिक एकजुटता, त्याग और संघर्ष की बदौलत यह पहली जीत मिली है।
ऐलनाबाद में बैठक के दौरान उपस्थित किसान व किसान नेता- फोटो : Sirsa
अनाज मंडी में किसानों को मिठाई खिलाते किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख- फोटो : Sirsa