सिरसा। जानलेवा हमला करने के 13 साल पुराने एक मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने एक आरोपी को बरी कर दिया जबकि एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। न्यायालय ने दोषियों को जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में थाना कालांवाली पुलिस ने जुलाई 2010 को एफआईआर दर्ज की थी। 13 वर्ष चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सिंह ने इस मामले का निपटारा कर दिया।
मामले के अनुसार गांव कालांवाली निवासी बलजिंद्र सिंह की चाची मूर्ति ने 27 कनाल एक मरला जमीन गांव के गुरतेज सिंह से लेकर कब्जा कर लिया और इसमें नरमे की बिजाई कर दी। 28 जुलाई 2010 को बलजिंद्र सिंह, गुरजीत सिंह, बंत सिंह, जसकरण सिंह, बलकरण सिंह नरमा की गुड़ाई कर रहे थे। शाम को जीप, कार, ट्रैक्टर व बाइक पर सवार होकर गांव कालांवाली निवासी प्रताप सिंह, बगड़ सिंह, जग्गी सिंह, गुरसेवक सिंह, सुखराज सिंह, अकवाम, जसवंत सिंह, काला सिंह निवासी रोड़ी, बलजिंद्र व 10-15 अन्य लोग आए।
इस दौरान प्रताप सिंह ने अपनी बंदूक से बंत सिंह पर गोली चला दी। जो उसके पैर पर लगी। इसके बाद उक्त सभी लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। गोली लगने से घायल हुए बंत सिंह को उपचार के लिए अस्पताल में ले जाया गया। पुलिस को दिए बयान में बलजिंद्र सिंह ने बताया था कि उक्त लोग उनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए आए थे। पुलिस ने बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
ये आरोपी पाए गए दोषी
13 वर्ष तक न्यायालय में चले इस मामले का निपटारा करते हुए शुक्रवार को न्यायाधीश कुलदीप सिंह ने आरोपी प्रताप सिंह, गुरसेवक सिंह, महेंद्र सिंह, सुखदीप सिंह, दर्शन सिंह, बगड़ व जगसीर सिंह को दोषी करार देते हुए 5-5 साल की सजा सुना दी। दोषी प्रताप को साढ़े 11 हजार रुपये व अन्य दोषियों को साढ़े छह-छह हजार रुपये जुर्माना किया। आरोपी सुखराज सिंह को न्यायालय ने बरी कर दिया। जबकि बलजिंद्र की वर्ष 2018 में मौत हो चुकी है।