विवादों में घिरी वैश्य संस्था के लिए बड़ी खबर है। प्रधान की कुर्सी खाली होने से लावारिस सी लग रही संस्था को अब कर्ता धर्ता मिल जाएंगे। संस्था के लिए इंतजार की घड़ियां खत्म हो गई हैं और 8 अप्रैल को एक ही दिन में गवर्निंग बॉडी के 21 सदस्यों को चुन लिया जाएगा। इन्हीं 21 सदस्यों में से प्रधान और उपप्रधान चुने जाएंगे। एक ही दिन में नामांकन से लेकर शाम तक प्रधान चुनने की प्रक्रिया को पूरा कर दिया जाएगा।
बता दें कि अगस्त 2015 से यहां प्रधान की कुर्सी खाली पड़ी है। 105 कॉलेजियम सदस्यों वाली संस्था में अविश्वास लाकर गवर्निंग बॉडी को भंग कर दिया गया था। अब सभी 105 सदस्य वोट डालेंगे। चुनाव हुडा प्रशासक व रिटर्निंग ऑफिसर सुनीता के निर्देशन में होगा। अभी डीसी बतौर प्रशासक संस्था का कार्यभार संभाल रहे हैं। डीसी के निर्देश पर जिला सोसायटी रजिस्ट्रार ने हुडा अधिकारी को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है।
8 अप्रैल को यूं मिलेगा प्रधान
नामांकन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक।
नामांकन पत्रों की छंटनी सुबह 10 बजे से 11 बजे तक।
नामांकन पत्र वापस लेंगे सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक।
उम्मीदवारों की सूची चस्पा दोपहर 1 बजे।
चुनाव चिह्न दिए जाएंगे दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक।
मतदान दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
वोटों की गिनती और परिणाम वोटों की गिनती के बाद।
घोषित होंगे
ये पदाधिकारी चुने जाएंगे
चुनाव में प्रधान, उप प्रधान, महासचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष सहित गवर्निंग बॉडी के 16 एक्ज्यूक्टिव सदस्य।
इन विवादों के साथ बीता 2015-16
- अगस्त 2015 में गवर्निंग बॉडी को भंग कर दिया गया।
- संस्था के स्कूल-कॉलेज में कार्यरत 100 से अधिक कर्मियों को नौकरी से निकाला।
- वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टाफ को लगभग पांच माह से तनख्वाह नहीं मिली।
- वीआईएमटी स्टाफ को नौकरी से बाहर निकालकर संस्थान ही बंद कर दिया गया।
- कई लोगों को नौकरी से बाहर कर करोड़ों से अधिक की रिकवरी के नोटिस जारी कर दिए गए।
- महात्मा गांधी और लाजपत राय फंड के नाम पर लाखों के घोटाले का भंडाफोड़।
इधर, इंजीनियरिंग कॉलेज से तीन और निकाले
वैश्य संस्था में कर्मचारियों को निकाले जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज से तीन और कर्मचारियों को निकाला गया है। इनमें एक अकाउंटेंट, एक स्वीपर और एक शिक्षक शामिल है। अनियमितता का हवाला देकर लगातार कर्मियों को निकाले जाने से संस्था में भारी रोष है। सभी को उम्मीद है कि संस्था में नये प्रधान और गवर्निंग बॉडी ही उन्हें बचा सकती है।