चंडीगढ़ में एचएसआईआईडीसी अधिकारी से मुलाकात करते उद्यमी।
बहादुरगढ़। उद्योगों की समस्याओं को लेकर बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) व फुटवियर पार्क एसोसिएशन के पदाधिकारी चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुशील सरवान से मिले। उन्होंने ट्रांसपोर्ट सुविधा, पानी के बिल समेत कई मुद्दे उठाए। मुलाकात के बाद पदाधिकारियों ने दावा कि जल्द ही बहादुरगढ़ में 40 से 50 एकड़ में ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाएगा। इसका भरोसा प्रधान सचिव और एमडी ने दिया है।
बीसीसीआई और फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल में शामिल प्रधान सुभाष जग्गा, पवन जैन,उद्यमियों ने बताया कि बैठक में उद्योगों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेष रूप से बहादुरगढ़ में ट्रांसपोर्ट सुविधा कम होने का मसला उठा। उद्यमियों ने बताया कि उन्हें अपना माल दिल्ली के ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से भेजना पड़ता है। बहादुरगढ़ उद्योगिक क्षेत्र है यहां पर ट्रांसपोर्ट नगर होना चाहिए ताकि यहीं से माल की बुकिंग कर ट्रांसपोर्ट से दूसरे शहरों में भेजा जा सके। उद्यमियों ने अधिकारियों को बहादुरगढ़ में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की मांग की। इस पर एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक ने बहादुरगढ़ में 40-50 एकड़ में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का भरोसा दिया है।
एमआईई फ्री होल्ड प्रॉपर्टी को विशेष महत्व देते हुए चर्चा की। जिसमें त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया और अगले महीने के भीतर अंतिम समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। अधिकारियों के समक्ष उद्यमियों ने एमआईई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत उद्योगों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया। जिनके समाधान का भरोसा मिला। एमआईई के पुराने उद्योगिक पुर्ननिर्माण पर भी चर्चा की गई। जिसके लिए उन्होंने तुरंत काम में तेजी लाने के लिए कहा। साथ ही बढ़े हुए पानी के बिलों के मुद्दे को लेकर भी बैठक में बातचीत की। जिसके दौरान गलत बिलों में सुधार करने का आश्वासन दिया। बीसीसीआई और फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल में प्रधान सुभाष जग्गा, पवन जैन, संजय, विनोद, नरिंदर छिकारा, संजय छिकारा, सिद्धार्थ दुबे व अन्य ने बैठक में सक्रिय रूप से भाग लिया।
-उद्यमियों ने ये उठाई मांग
-शहर में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बेहतर बनाई जाए
-पानी के बढ़े हुए बिलों की समस्या पर विचार
-एमआईई के पुराने उद्योगिक भवन का पुर्ननिर्माण