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साढ़े तीन साल की बच्ची का माइनर की मोरी में फंसा मिला शव

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खेतों में अपने साथ ले गई पोती को दादी ने मोबाइल देकर कार्टून देखने में लगा दिया। दादी घास काटने लग गई। बच्ची भटक गई। साथ ही लगते माइनर में गिरने से बच्ची की मौत हो गई। शव माइनर की मोरी में फंसा मिला।
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यह दर्दनाक घटना रविवार को बलंभा माइनर के पास खेतों में हुई। गोयतपाना निवासी राजबाला अपनी साढ़े तीन साल की पोती काव्या को घास लेने अपने साथ ले गई थी। काव्या का पिता जितेंद्र उर्फ सोनू गुरुग्राम में काम करता है। काव्या की मां अपने मायके गई हुई थी। बारिश के चलते राजबाला ने काव्या को मोबाइल देकर खेतों में बने एक कमरे में बैठा दिया। काव्या मोबाइल पर कार्टून देखने में लग गई। जब दादी वापस आई तो मोबाइल वहीं पड़ा था, लेकिन बच्ची कमरे में नहीं मिली। उन्होंने पुलिस को सूचित किया। सब इंस्पेक्टर तेजा सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद आसपास के गांवों में मुनादी करवाई गई। लगभग पांच घंटे बाद बलंभा माइनर की टाबर वाली मोरी में काव्या का शव फंसा हुआ मिला। शव का पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
कयास : दादी की तलाश में भटक गई काव्या
कयास लगाए जा रहे हैं कि बच्ची कुछ देर बाद ही दादी की तलाश में कमरे से निकली और भटक गई। कमरे के पास ही नहरी पानी की खाल में काव्या के कुछ दूर तक पैरों के निशान भी मिले। आसपास फसलों में चप्पे-चप्पे पर उसे तलाशा गया। आखिर 25-30 एकड़ दूर मोरी में उसका शव फंसा हुआ मिला। माइनर में ज्यादा पानी भी नहीं था। बारिश या खेतों से निकासी का पानी ही माइनर में बह रहा था। आशंका है कि नाली से होते हुए काव्या माइनर की ओर चली गई। वहां माइनर में गिर गई। बच्ची माइनर में गिरने के बाद उठ नहीं पाई और उसकी मौत हो गई। पानी की दिशा के साथ बहती हुई मोरी तक चली गई। जहां जाकर उसका शव फंस गया।
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अनेक आशंकाओं में बीता समय
बच्ची के इस प्रकार से गायब होने की खबर हर ओर फैल गई थी। परिजनों के अतिरिक्त आसपास के किसान भी घटनास्थल पर पहुंच गए। जब तक काव्या का शव नहीं मिला तब तक अनेक आशंकाओं और कयास में समय बीता। काव्या के मौत से हर व्यक्ति दुखी था।
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