बिजली निगम के ‘हाकिम’ को पता ही नहीं और उसके मातहत स्टोर में जमा मीटर को उपभोक्ता को देकर बिजली चोरी करवा रहे थे। इसका खुलासा तब हुआ, जब विजिलेंस टीम ने कुछ दिन पहले एक आरओ प्लांट पर छापा मारकर बिजली चोरी पकड़ी थी। मीटर की जांच के बाद अफसर को मामले की जानकारी हुई है। अधीक्षण अभियंता ने उपभोक्ता तक मीटर के पहुंचने की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
बिजली निगम की विजिलेंस टीम ने विगत दिनों सेक्टर-36 स्थित आरओ प्लांट में छापा मारकर बिजली चोरी पकड़ी। जांच में पता चला कि प्लांट पर बिजली निगम के ही मीटर बदलकर बिजली चोरी की जा रही थी। बिलिंग का समय आता तो वर्तमान में निगम के दस्तावेज में अंकित मीटर लगा दिया जाता। बिलिंग के बाद मीटर बदलकर बिजली चोरी की जाती थी। विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद आरओ प्लांट संचालक पर 26 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने कार्यकारी अभियंता मेहताब सिंह को उपभोक्ता तक उतारे गये मीटर के पहुंचने की जांच करने और दोषी पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अधीक्षण अभियंता एके यादव ने बताया कि उतारा गया मीटर उपभोक्ता के पास मिलना और उसका बिजली चोरी में इस्तेमाल होना गंभीर मामला है। कार्यकारी अभियंता की रिपोर्ट आने के बाद दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि बिना विभागीय मिलीभगत के मीटर उपभोक्ता को नहीं मिल सकता है।
ये हैं बिजली मीटर बदलने के नियम
उपभोक्ता की शिकायत पर या लोड बढ़ने पर मीटर बदला जा सकता है। नया मीटर लगाने के दौरान जेई मौजूद रहते हैं। एसडीओ पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। उतारा गया मीटर गड़बड़ी होने की आशंका पर मौके पर ही सील करके जांच के लिए लैब भेजा जाता है। यदि मीटर सही लगता है तो उसे सीधे बिजली निगम के स्टोर में जमा कराना होता है।