प्रदेश सरकार से रेलवे को रोहतक स्टेशन के पास बना माल गोदाम लाहली गांव में शिफ्ट करने की क्लीन चिट मिल गई है। इसके लिए जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। माल गोदाम शिफ्टिंग में आने वाली दिक्कतों को प्रशासन दूर करेगा। इस मसले पर सोमवार को प्रशासन और रेलवे अधिकारी बातचीत करेंगे। नए माल गोदाम का स्थान चिह्नित होगा। जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन जमीन अधिग्रहण करके रेलवे को देगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार रोहतक स्टेशन का माल गोदाम दशकों पुराना है। यहां से हर साल लाखों टन गेहूं और खाद मालगाड़ी से आता-जाता है। चूंकि स्टेशन के आसपास का बाजार काफी व्यस्त हो गया है, इसलिए भारी वाहनों के आवागमन में दिक्कतें होती हैं। बाजारों में जाम लग जाता है और अक्सर रात के समय माल की ढुलाई होती है। कुछ समय पहले माल गोदाम को शिफ्ट करने की मांग उठी तो मामला शासन के पास पहुंचा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश सरकार की तरफ से माल गोदाम को अन्य जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव रेलवे को भेजा गया, जिस पर रेलवे अधिकारियों ने डोभ के नजदीक गांव लाहली में माल गोदाम बनाने का स्थान चिह्नित किया। अब रेलवे और प्रदेश सरकार ने लाहली में माल गोदाम बनाने के प्रस्ताव पर सहमति जता दी है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि सोमवार को प्रशासन के साथ होने वाली बैठक में माल गोदाम के क्षेत्रफल के साथ-साथ शिफ्टिंग की समयावधि पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यदि लाहली में रेलवे को माल गोदाम बनाने के लिए जमीन की जरूरत होगी तो अधिग्रहण करके दिया जाएगा।
भारी वाहनों की वजह से होगा शिफ्ट
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि माल गोदाम से माल की ढुलाई के लिए आने वाले भारी वाहनों की वजह से आसपास के एरिया में जाम की स्थिति बनी रहती थी। यही नहीं, भीड़भाड़ के कारण हादसे की आशंका होने की वजह से लोग माल गोदाम शिफ्टिंग की मांग कर रहे थे।
कुछ व्यापारियों के उठने लगे विरोध में स्वर
माल गोदाम लाहली में शिफ्ट होने की भनक लगते ही कुछ व्यापारियों ने विरोध के स्वर मुखर करना शुरू कर दिया है। विगत दिनों रेलवे अधिकारियों को माल गोदाम की शिफ्टिंग नहीं करने का पत्र भी सौंपा गया था। व्यापारियों का तर्क है कि माल गोदाम शिफ्ट हुआ तो उनके माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाएगा।
90 फीसदी गेहूं व 10 फीसदी खाद की होती है ढुलाई
जिला प्रशासन का कहना है कि रोहतक स्टेशन के माल गोदाम से साल में 90 फीसदी गेहूं और 10 फीसदी खाद का आना-जाना होता है। ऐसे में विरोध के स्वर तो नहीं उठे चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि गेहूं आरएफसी यानी सरकारी एजेंसी का होता है। खाद भी सरकारी ही होती है, जिसका सीधा प्रभाव व्यापारियों पर नहीं पड़ता।
रेलवे दिखाएगा आज अपनी जमीन का दस्तावेज
जिला प्रशासन के साथ होने वाली मीटिंग में आज रेलवे अधिकारी लाहली में अपनी जमीन के दस्तावेज लेकर जाएंगे। माल गोदाम के लिए कितनी जमीन की जरूरत होगी, इसका भी हवाला देंगे। यदि माल गोदाम के लिए रेलवे जमीन की मांग करेगा तो प्रशासन अधिग्रहण करके देगा।
रेलवे का माल गोदाम रोहतक से गांव लाहली में शिफ्ट करने का आज मसौदा तैयार किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज के साथ बुलाया गया है। यदि रेलवे की तरफ से जमीन की मांग की जाएगी तो प्रशासन अधिग्रहण करेगा। माल गोदाम का विरोध तो होना नहीं चाहिए क्योंकि 90 फीसदी गेहूं और 10 फीसदी खाद की ढुलाई होती है। राहत, यह है कि आसपास के व्यस्ततम बाजारों में भारी वाहनों के आवागमन से जाम नहीं लगेगा। जाम की वजह से रात के समय होने वाली ढुलाई दिन में ही हो जाएगी।
- राकेश सैनी, एसडीएम रोहतक