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कार सवार बोले-सुबह से भूखे-बेहाल घूम रहे, जाने दो तो कराया भोजन

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किसानों के भारत बंद के दौरान खरावड़ के टहलनाथ गोशाला के पास से जाम में फंसने पर लंगर में परिवार के
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दिल्ली रोड पर किसानों ने खरावड़ पर सड़क जाम कर रखी थी। तभी दो कारों में कुछ परिवार वहां पहुंचे। कार से उतरकर महिलाओं ने किसानों से कहा, सुबह से भूखे-बेहाल घूम रहे हैं, अब तो निकल जाने दो। किसान नेता ने कहा कि भूखे-बेहाल क्यों घूम रहे हो, पहले प्रसाद लो।
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इस तरह कार से उतरे सभी लोगों को रोटियां, चने की सब्जी और हलवा खिलाया गया, चाय पिलाई गई, लेकिन उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी गई। भंडारे पर मौजूद किसानों ने दलील दी कि उनका काम सिर्फ भोजन करवाना है। जाने के बारे में फैसला दूसरे लोग लेते हैं, वे नहीं जाने देंगे। इसी दौरान दिल्ली की ओर से एक एंबुलेंस पहुंची। किसानों ने आनन-फानन में रास्ता खुलवाया। सबसे आगे एक ट्रैक्टर और ट्राला था, उसके हटे बिना एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिल सकता था, इसलिए उसे निकाल दिया गया। उसके पीछे एक कार में तीन महिलाएं थीं, उनके पीछे एक और कार थी। एंबुलेंस की आड़ में दोनों कारों ने निकलने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने दोनों कारों को साइड में लगवाया और एंबुलेंस को रास्ता दिया। हर नाके पर अलग नियम था। मकड़ौली में अगर किसी बाइक सवार के पीछे महिला बैठी थी तो उसे जाने दिया गया, लेकिन एक ऑटो आया, जिसे महिला चला रही थी और उसमें कई महिलाएं सवार थीं, उसे जाने की इजाजत नहीं दी।
न्यायपालिका लिखी एक कार को लौटाया
एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों को भी रास्ता दिया गया। बड़ी संख्या में दूध ले जा रहे बाइक सवार युवक फंसे, उन्होंने साइड से निकलने की कोशिश की तो वहां भी रोक दिया गया। किसानों ने दूध वालों को खासी फटकार लगाई कि तुम तो किसान के बेटे हों, तुम भी बंद का समर्थन नहीं कर रहे। आईएमटी चौक पर न्यायपालिका लिखी एक कार को लौटा दिया गया। एक युवती ने बताया कि उसकी परीक्षा है तो कागजात देखने के बाद उसे जाने की इजाजत दी गई। इस बार सभी नाकों पर किसान सख्त थे। उनका कहना था कि लोगों को पहले से पता है, इसके बावजूद वे क्यों बाहर निकल रहे हैं। इसलिए किसी को भी छूट नहीं दी गई।
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