फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोहतक: धूप व त्वचा कैंसर से सुरक्षा देगी एमडीयू की सनस्क्रीन क्रीम, बनाया हर्बल-मिनरल्स फार्मूला

Thu, 24 Feb 2022 02:34 AM IST
भूपेंद्र सिंह विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

पराबैंगनी किरणों से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए हर्बल-मिनरल्स फार्मूला बनाया गया है। विश्वविद्यालय के औषधि विज्ञान संकाय के फार्मूले को पेटेंट मिल गया है। क्रीम त्वचा का लचीलापन तोड़कर समय से पहले झुर्रियां देने वाले एंजाइम को लॉक करेगी।
विज्ञापन
सनस्क्रीन का चित्र, मिला पेटेंट प्रमाण पत्र। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सूर्य की पराबैंगनी किरणों यानी यूवी ए-बी से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याएं अब परेशानी नहीं बनेंगी। त्वचा संबंधी कैंसर होने का खतरा भी कम होगा। है न गजब। मगर, सच यही है। यह उपलब्धि हासिल की है हरियाणा के रोहतक में स्थित एमडीयू (महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी) के औषधि विज्ञान संकाय ने।

विज्ञापन


यहां की एक शोधार्थी ने अपनी गाइड की देखरेख में सूर्य की घातक किरणों से बचाने वाले केसर के गुणकारी तत्व व स्वदेशी जड़ी-बूटियों पर शोध कर ब्रॉड स्पैक्ट्रम सन प्रोटेक्टिव फार्मूला तैयार किया है। यह हर्बल सनस्क्रीन क्रीम भारतीय व भारतीय लोगों जैसी त्वचा रखने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक सनस्क्रीन का प्रयोग नहीं किया गया है। इस फार्मूले के लिए एमडीयू को पेटेंट कार्यालय से प्रमाणपत्र मिल गया है।
 
एमडीयू के औषधि विज्ञान संकाय के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हो गई है। विश्वविद्यालय के औषधि विज्ञान संकाय की प्रोफेसर डॉ. संजू नंदा व उनकी शोधार्थी डॉ. कुमुद मदान ने सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा को सुरक्षित रखने का फार्मूला तैयार किया है। यह हर्बल फार्मूला अब तक के बाजार में उपलब्ध सनस्क्रीन क्रीम के मुकाबले कहीं बेहतर होने का दावा किया जा रहा है। यह त्वचा संबंधी सामान्य समस्याओं के साथ समय से पहले आने वाली झुर्रियों व त्वचा कैंसर के खतरे से भी सुरक्षित रखने में मददगार होगी। इस सनस्क्रीन क्रीम में एंटी आक्सीडेंट, एंटी-इनफ्लेमेटरी समेत कई गुण हैं।
विज्ञापन



एंजाइम तोड़ते हैं त्वचा का लचीलापन 
सूर्य से मुख्यत: तीन तरह की पराबैंगनी किरणें निकलने लगती हैं। इनमें से यूवी-सी ओजोन परत के कारण लौट जाती है। यूवी ए व बी त्वचा को प्रभावित करती है। बाजार में मिलने वाली सनस्क्रीन यूवी-बी से से सुरक्षित रखने वाले हैं। इनमें भी रसायनों का प्रयोग होता है। यूवी-ए त्वचा में बी से ज्यादा गहराई तक पहुंचती है। यह कैंसर रोग का भी कारण बनती है।

ये किरणें त्वचा में मौजूद एलास्टेज, कोलाजिनेस व हायलायूरिनडेज एंजाइम को सक्रिय करता है। यह एंजाइम त्वचा के लचीलेपन को तोड़ता है। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। इसमें झाइयां, फिर झुर्रियां व अंत में त्वचा कैंसर का कारण बनते हैं। यह सनस्क्रीन यूवी ए व बी दोनों से सुरक्षा करेगा। लगाने में आरामदायक यह सनस्क्रीन त्वचा पर दिखाई भी नहीं देती है। इसके लिए जड़ी-बूटियों के प्राकृतिक रंग लिए गए हैं। इस कारण इसके किसी तरह के रसायन के दुष्प्रभाव की आशंका समाप्त हो जाती है। यह सनस्क्रीन त्वचा में लंबे समय तक नमी बनाए रखेगी। 


नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित है शोध 
सनस्क्रीन क्रीम शोध नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसमें केसर के सेफरनल तत्व को लिया गया है। इसमें सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचने का गुण मौजूद है। इसके साथ स्वदेशी औषधियां या मिनरल्स भी शामिल किए गए हैं। नैनो टेक्नोलॉजी के अलावा शोध को डाकिंग स्टडीज यानी कंप्यूटर पर विशेष सॉफ्टवेयर पर भी परखा गया है। इसमें आरओएस यानी रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीसेस का असर देखा गया है। - डॉ. कुमुद मदान, शोधार्थी, एमडीयू 

शोध को मिला पेटेंट, कुलपति ने सराहा 
भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से ब्रॉड स्पैक्ट्रम सन प्रोटेक्टिव टॉपिकल फोरम्यूलेशन विषय पर हुए शोध को पेटेंट मिल गया है। इस संबंध में भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय की ओर से प्रमाणपत्र जारी हुआ है। इस उपलब्धि के लिए औषधि विभाग की प्रोफेसर डॉ. संजू नंदा व डॉ. कुमुद मदान का प्रयास सराहनीय है। यह विवि के लिए गौरवपूर्ण है। प्रो. संजू नंदा ने इस उपलब्धि के लिए कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नवरत्न शर्मा, कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा, कुलपति के सलाहकार प्रो. एके राजन, आईपीआर प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. हरीश दूरेजा व उप निदेशक डॉ. राजीव कुमार कपूर का विशेष आभार जताया है। - प्रो. हरीश दूरेजा, निदेशक, बौद्धि संपदा अधिकारी, एमडीयू 
विज्ञापन



डॉ. कुमुद मदान ने ब्रॉड स्पैक्ट्रम पर शोध किया है। इसके तहत पराबैंगनी किरणों (यूवी- ए व बी) का त्वचा पर होने वाला असर देखते हुए इससे सुरक्षा के लिए हर्बल सनस्क्रीन क्रीम का फार्मूला तैयार किया गया है। इसे पेटेंट मिल गया है। अब इस फार्मूले को व्यावसायिक दृष्टि से बड़े स्तर पर प्रयोग किया जा सकता है। इससे विवि को भी आय प्राप्त होगी। यह फार्मूला दूसरे सनस्क्रीन के मुकाबले कहीं बेहतर है। इसके दुष्प्रभाव भी नहीं हैं। यह पूरी तरह स्वदेशी जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया है। - प्रो. संजू नंदा, डीन, औषधि विज्ञान संकाय, एमडीयू 


विवि शोध के साथ पेटेंट हासिल करने के लिए भी प्रयास कर रहा है। शोध करने व पेटेंट प्राप्त करने के लिए आईपीआर पॉलिसी व सेल बनाई गई है। इसी कड़ी में सनस्क्रीन क्रीम का पेटेंट मिला है। पेटेंट एक्ट 1970 के प्रावधानों के तहत 20 वर्ष के लिए विवि को यह पेटेंट प्राप्त हुआ है। इसका श्रेय विवि परिवार को जाता है। भविष्य में इस ओर बेहतर प्रयास किए जाएंगे। इससे विवि की रैंकिंग व नैक रैंक हासिल करते समय भी लाभ मिलेगा। - प्रो. राजबीर सिंह, कुलपति, एमडीयू 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें