पीजीआई की आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर पर भाई को राखी बांधती बहन। नीरज वर्मा
आसमान में सितारे हैं जितने उतनी जिंदगी हो तेरी, रक्षाबंधन के दिन भगवान से बस यही दुआ है मेरी...। ये पंक्तियां रक्षाबंधन के दिन उस बहन की फरियाद जैसी हैं, जिसका भाई पीजीआई में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। ससुराल से आई बहन को विश्वास है कि राखी के कच्चे धागे की डोर भाई को मौत के मुंह से जरूर खींच लाएगी। इसी उम्मीद में बहन ने जब तक वेंटिलेटर पर बेसुध भाई को राखी नहीं बांध ली तब तक अन्न-जल भी ग्रहण नहीं किया।
गांव गांधरा निवासी मीना का इकलौता भाई रामनिवास (42) तीन दिन से पीजीआई की आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) में जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। मीना ने बताया कि भाई भिवानी में मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता है। कुछ समय पहले उसे लीवर में दिक्कत हुई जिसका उपचार कराया, मगर राहत नहीं मिली। लीवर में ज्यादा संक्रमण होने पर पीजीआई में दिखाया, जहां डाक्टरों ने भर्ती कर लिया। तीन दिन से उसकी हालत काफी नाजुक है, जिससे वह आईसीयू में भर्ती है।
मीना ने रोते हुए बताया कि दो दिन पहले गांधरा गांव से आई तो साथ में राखी और तिलक लगाने को रोली-चावल लेकर आई। उसे भरोसा है कि उसकी राखी की डोर उसके भाई की जिंदगी बचाएगी। जिसकी वजह से उसने रविवार को रक्षाबंधन पर सुबह से अन्न-जल तक नहीं लिया। दोपहर में जब डाक्टरों को उसके दृढ़ विश्वास के बारे में पता चला तो उन्होंने भाई की कलाई पर रखी बांधने को समय दिया। मीना ने कहा कि भगवान उसकी राखी की डोर की लाज रखेगा और भाई को सही सलामत घर पहुंचाएगा।
आईसीयू के डॉक्टर ने बताया कि रामनिवास की हालत काफी नाजुक है। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह का त्योहार है। जब पता चला कि उसकी बहन राखी बांधना चाहती है, तो उससे राखी बंधवाई गई है।