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छोटी बहन ने साढ़े तीन लाख रुपये दिए तो पेरिस में खेल पाया, वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद कर्ज उतारने के लिए बेचनी पड़ी दुकान

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डिस्कस थ्रो के खिलाड़ी विनोद।
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देश के लिए कुछ बेहतर करने की इच्छा और मजबूत इरादे हो तो कुछ भी संभव है। परचून की दुकान चलाने से डिस्कस थ्रो के स्टार खिलाड़ी बनने वाले विनोद ने कुछ यहीं करने की ठानी है। आर्थिक तंगी व तमाम मुश्किलों से जूझते हुए यह खिलाड़ी टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक खेलों में भाग लेने के लिए वहां पहुंच चुका है। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में खिलाड़ी ने अपना संघर्ष साझा किया है। गन्नौर में जन्मे व रोहतक के शास्त्री नगर में रहने वाले विनोद ने बताया कि वह वर्ष 2016 से डिस्कस थ्रो खेल से जुड़ा है। राजीव गांधी खेल परिसर के पास परचून की दुकान चलाते हुए आर्चरी कोच संजय सुहाग से पैरा गेम्स की जानकारी मिली। पैरालंपिक खिलाड़ी दीपा के गोल्ड मेडल ने जोश भरा। पदक की राह पर निकला तो कोच के कहे, आ तो गए हो कितने दिन रहोगे यह देख लेना, शब्दों ने जोश भरने का काम किया। कोच अमरजीत के साथ डेढ़ साल से कड़ी ट्रेनिंग कर वर्ष 2017 में जयपुर में हुई नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इसके बाद वर्ष 2018 में पंचकूला में हुई नेशनल चैंपियनशिप, वर्ष 2019 में पेरिस में हुई ग्रांड पिक्स पेरिस चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। दुबई में नवंबर 2019 में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में दस्तावेजों में कमी के कारण टीम चली गई और मैं रह गया। बड़ी मुश्किल से खेल शुरू होने से 5 घंटे पहले वहां पहुंचा। यहां भी मुश्किलें कम नहीं हुई। मेरी व्हील चेयर ही गुम हो गई। शाम को मुकाबला होना था। जिस चेयर पर बैठकर थ्रो करना था उसमें क्रैक आ गया। कड़ी मशक्कत के बाद इस चैंपियनशिप में चौथा स्थान आया। इसके साथ ही देश को पहला ओलंपिक कोटा भी मिला। अपने इस सफर के लिए पैसे नहीं थे। छोटी बहन प्रोमिला ने पति राजपाल उर्फ नीटू से साढे़ तीन लाख रुपये लेकर दिए तो चैंपियनशिप में शामिल हो सका। वापस आकर ब्याज पर पैसे लेकर उधार चुकाया। अब कर्ज की किस्त भर रहा हूं। पेरिस में ही कोच सत्यनारायण से मुलाकात हुई। उन्होंने मार्गदर्शन के साथ प्रशिक्षण भी दिया। पैरालंपिक में जाने से पहले उनके पास बैंगलोर में ही रह कर अभ्यास किया। वहां 5 अक्तूबर को गया था। वर्ष 2021 में बैंगलोर में हुई नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। अब मेरा लक्ष्य पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है। एशियन गेम्स में 21.86 मीटर डिस्कस थ्रो कर रिकॉर्ड बना चुका हूं। जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड 21.44 मीटर का है। खिलाड़ी ने कहा कि वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। पत्नी व दो बेटियों के लालन पालन की जिम्मेदारी व कर्ज का बोझ बढ़ा तो अपनी दुकान बेचनी पड़ी। बड़ी बेटी साक्षी 7 साल की व छोटी 2 साल की याक्षी है। पिता धर्मपाल सेवानिवृत्त फौजी थे। वर्ष 2010 में उनका निधन हो चुका है। मां ओमपती वर्ष 2004 में गुजर चुकी है। छोटा भाई गन्नौर में रहता है। दो बहनें हैं। उनकी शादी हो चुकी है।
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