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UPSC Result: रोहतक के पुल्कित बल्हारा ने बिना कोचिंग घर रह कर की पढ़ाई, पहले ही प्रयास में 65वीं रैंक पाई

Tue, 31 May 2022 03:09 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

यूपीएससी परीक्षा पास करने व सिविल सेवा में परिवार के पहले सदस्य पुल्कित ने कहा कि आईआईटी मुंबई से पढ़ाई के बाद जगुआर कंपनी में प्लेसमेंट मिला। यहां काम के साथ यूपीएससी प्री टेस्ट की तैयारी की।
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पुल्कित बल्हारा को बधाई देते हुए। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
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आईएएस का प्रोफाइल, मेरे काम का तरीका व मेरी पर्सनैलिटी से मेल खाता है। इसलिए सिविल सर्विस में आईएएस को चुना। ऐसा नहीं है कि बाकी सर्विसेज में मैं काम नहीं करना चाहता या नहीं कर सकता। जहां अवसर मिलेगा मैं बेहतर करूंगा। यूपीएससी परीक्षा में भी बेहतर प्रयास करते हुए पहली ही बार में 65वां रैंक हासिल किया है। इसके लिए कोचिंग नहीं की। घर रह कर ही पढ़ाई की। यह कहना है हरियाणा के रोहतक जिले के गांव बहुअकबरपुर हाल सेक्टर तीन निवासी पुल्कित बल्हारा का। अमर उजाला से बातचीत में यूपीएससी परीक्षा पास करने व अपने संघर्ष की कहानी साझा की। 

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यूपीएससी परीक्षा पास करने व सिविल सेवा में परिवार के पहले सदस्य पुल्कित ने कहा कि आईआईटी मुंबई से पढ़ाई के बाद जगुआर कंपनी में प्लेसमेंट मिला। यहां काम के साथ यूपीएससी प्री टेस्ट की तैयारी की। यह परीक्षा पास होने पर कंपनी से त्यागपत्र देकर अगली परीक्षा की तैयारी में जुट गया। पढ़ाई के घंटे या समय नहीं देखे। जब मन किया रात भर पढ़ा, जब मन किया दिन भर पढ़ता रहा।

आराम के समय आराम किया। हां, सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। यहां समय बर्बाद करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर फोकस किया। इसके लिए जरूरी होने पर पुस्तकालय भी जाया करता था। पढ़ाई से थकने पर फुटबॉल, बैडमिंटन या मेडिटेशन करता। इसके जरिये खुद को फिट रखने का भी मौका मिलता है। सामान्य जीवन पसंद है। 
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युवाओं के विकास पर करना है फोकस 
आईएएस बनने पर पुल्कित की सोच युवाओं के विकास के लिए काम करने पर फोकस करने की है। युवाओं को दिशा देने के लिए शिक्षा जरूरी है। इस सिस्टम को गुणवत्ता परक, सुचारु व उपयोगी बनाने पर जोर दिया जाएगा। उद्यमशीलता इसका एक हिस्सा है। युवाओं का शिक्षा प्राप्त करने व रोजगार पाने का सपना रहता है। यह सपना पूरा करना है। इसलिए सिविल सर्विस में आया हूं। 

शिक्षक माता-पिता से मिला प्रोत्साहन 
पुल्कित के पिता जसवंत बल्हारा फिजिक्स के ट्यूटर हैं। मां संतोष सरकारी स्कूल में गणित की अध्यापिका हैं। छोटी बहन स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। इन सभी का पुल्कित की सफलता में महत्वपूर्ण स्थान व योगदान है। उनका कहना है कि परिवार ने हर समय मुझे प्रोत्साहित किया। इसी वजह से सफल हुआ।

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