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मुर्दे को गवाह दिखा पुलिस ने कर ली पूछताछ

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सेवा, सुरक्षा व सहयोग का दावा करने वाली पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झपटमारी के केस में पुलिस ने साढ़े 5 माह पहले मर चुके बड़े भाई को छोटे भाई के खिलाफ न केवल गवाह बना दिया, बल्कि तफ्तीश में शामिल दिखाकर पूछताछ भी कर ली। शुक्रवार को जमानत अर्जी पर बहस के दौरान वकील ने अदालत के सामने पुलिस को आइना दिखाया। कोर्ट ने दो घंटे जांच अधिकारी को न केवल अदालत में परिसर में बैठाकर रखा, बल्कि थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को तलब भी किया। बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
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वकील पंकज बेरी ने बताया कि सिटी पुलिस ने भगवानदास कॉलोनी निवासी कर्ण को झपटमारी के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग थानों में दर्ज 11 केस का खुलासा कर दिया। तीन केस में आरोपी को जमानत मिल चुकी है। जबकि चार केस में अब याचिका दायर की गई थी। शुक्रवार को अदालत में जून 2020 में शीतल नगर की एक महिला के साथ हुई झपटमारी के मामले में सुनवाई हुई। शिवाजी कॉलोनी थाने में दर्ज केस में पुलिस ने 16 हजार रुपये बरामद किए। मामले में जमानत के लिए एएसजे मैनपाल रमावत की अदालत में याचिका दायर की गई थी।
वकील ने दिखाया मृत्यु प्रमाण पत्र, जांच अधिकारी ने मानी गलत
पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल रिकॉर्ड में बताया गया है कि 13 जनवरी 2021 को जांच अधिकारी ने झपटमारी के आरोपी कर्ण के बड़े भाई नितिन को तफ्तीश में शामिल कर बयान दर्ज किए गए। नितिन की तरफ से लिखा गया है कि, मैं मुकदमा की तफ्तीश में शामिल रहा हूं। मैंने मोटरसाइकिल एचआर 12एई-5708 खरीद रखी है। मेरे भाई कर्ण ने मेरी मोटरसाइकिल पर सवार होकर उपरोक्त वारदात को अंजाम दिया है। मैं आपके साथ मुकदमे की तफ्तीश में शामिल रहा हूं। आपने बयान दिया, सुन लिया, ठीक है। वकील ने अदालत को नितिन का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाया। बताया कि नितिन की मौत एक सड़क हादसे में 30 जुलाई 2020 को चुकी है। मरने के बाद नितिन कैसे पुलिस जांच में शामिल होकर अपने बयान दर्ज करवा सकता है। वहीं, वकील का दावा है कि अदालत में जांच अधिकारी ने शपथ पत्र देकर अपनी गलती मानी।
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चार दिन में चार केस में एक ही बेड से रिकवरी
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बचाव पक्ष के वकील पंकज बेरी ने बताया कि पुलिस की चार्जशीट में बताया गया है कि 12 नवंबर 2020 को पुलिस ने सिटी थाना पुलिस ने केस नंबर 802 में आरोपी कर्ण के भगवानदास कॉलोनी स्थित मकान में रखे बेड से 2600 रुपये बरामद किए। 13 नवंबर को सिविल लाइन थाना पुलिस ने केस नंबर 77 में 21 हजार रुपये, 15 नवंबर को केस नंबर 142 में चार हजार रुपये, केस नंबर 65 में दो हजार रुपये बरामद किए। इससे बड़ी चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि केस नंबर 349 में पुलिस ने 16 नवंबर को 16 हजार रुपये बरामद दिखाए हैं, लेकिन मकान भगवान दास कॉलोनी की जगह हिसार रोड लिखा है। अब सवाल उठता है कि एक ही बेड से बार-बार कैसे रिकवरी हुई। दूसरा, पुलिस ने एक केस में आरोपी के मकान की लोकेशन ही बदली दी।
पुलिस की जांच पर वकील ने उठाए सवाल
- साढ़े पांच माह पहले मर चुके युवक से कैसे की पुलिस ने पूछताछ। साथ ही तफ्तीश में शामिल भी दिखाया है।
- एक की बेड से अलग-अलग केस में कैसे रिकवरी हुई। क्या हर बार वारदात के बाद आरोपी वहीं पैसे छुपाता था। खास बात यह है कि ज्यादातर केस में पैसे की ही बरामदी दिखाई गई है।
- चार केस में पुलिस ने बरामदगी आरोपी के भगवान दास कॉलोनी स्थित किराये के मकान से दिखाई है, लेकिन एक केस में घर की लोकेशन हिसार बाईपास दिखाई है।
- एक केस में शिकायतकर्ता ने बताया कि स्कूटी सवार युवक ने झपटमारी की, लेकिन पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आरोपी को बाइक पर सवार बताया है।
11 केस में दायर पुलिस के खिलाफ दायर किया जाएगा इस्तगासा
एक युवक को 11 केस में पुलिस ने आरोपी बनाया है, लेकिन पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कैसे एक मरे हुए युवक को गवाह बना दिया गया। उससे पूछताछ दिखाई गई है। साथ ही रिकवरी भी एक जगह से दिखाई गई है। आरोपी युवक छह माह से ज्यादा समय से जेल में बंद है। मामलों में आरोपी की तरफ से कोर्ट में पुलिस के खिलाफ इस्तगासा दायर किया जाएगा।
- एडवोेकेट पंकज बेरी, वकील बचाव पक्ष
अदालत पर पूरा भरोसा, मुझे न्याय चाहिए
मेरे तीन बेटे थे। बड़े बेटे नितिन की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जबकि पुलिस ने उसके छोटे भाई के खिलाफ मर चुके भाई को गवाह बना दिया। 22 साल की उम्र में बेटे के खिलाफ 11 झपटमारी के केस दर्ज कर दिए गए। अब अदालत से ही न्याय की उम्मीद है। किसी अन्य के साथ पुलिस ऐसा करने से पहले कई बार सोचे, ऐसे में जांच अधिकारियों के खिलाफ भी न्याय की लड़ाई लडूंगा।
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- लोकनाथ, आरोपी का पिता
मामला मेरे नोटिस में है। कई बाद तिथि लिखते समय भी गलती हो सकती है। फिर भी मामले की गंभीरता से जांच करवाएंगे। आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई है।
- कृष्ण लोहचब, एएसपी, रोहतक
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