ग्राहक से निर्धारित 14 प्रतिशत के बजाय 38 से 50 प्रतिशत तक ब्याज वसूलना निजी कंपनी को भारी पड़ा। उपभोक्ता फोरम ने कंपनी पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कंपनी नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के हिसाब से ग्राहक को एक महीने में उसकी राशि लौटाएगी।
जिला उपभोक्ता फोरम के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने एक निजी कंपनी में पर्सनल लोन के लिए आवेदन किया था। इस पर कंपनी ने अन्य सरकारी बैंकों के समान 12 से 14 प्रतिशत की दर पर ऋण देने का आश्वासन देते हुए शिकायतकर्ता के सादे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए। लोन का स्वीकृति पत्र व अन्य दस्तावेज बाद में देने का आश्वासन दिया। उसे 3 लाख 24 हजार 299 रुपये का लोन स्वीकृत होने की बात कही। लोन के बाद शिकायतकर्ता ने किस्तें देनी शुरू कर दीं। इसके करीब एक साल बाद जब शिकायतकर्ता ने लोन स्टेटमेंट निकलवाई तो पता चला कि कंपनी ने 38 से 50 प्रतिशत वार्षिक दर पर ब्याज लगाया है। यह ब्याज दर अधिक व गैरकानूनी थी। शिकायतकर्ता ने कंपनी में शिकायत की। इस पर सुनवाई नहीं हुई। नतीजतन उसने 26 नवंबर 2019 को जिला उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दायर किया। इसके चलते उपभोक्ता से 14 प्रतिशत सालाना के हिसाब से ही लोन पर ब्याज लेने का निर्देश दिया। अधिक ब्याज दर के तहत वसूली गई राशि 9 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के हिसाब से उपभोक्ता को वापस दी जाए। साथ ही कंपनी पर 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। कंपनी को यह राशि एक महीने में चुकानी होगी।