अब जिले में किस जगह कितनी बंजर भूमि है या फिर कहां-कहां मीठा पानी है, इसकी जानकारी एक क्लिक पर मिलेगी। सरकारी विभाग अपने से संबंधित डाटा हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसैक) में निर्धारित मूल्य देकर हासिल कर सकेंगे। रकम चुकाने के बाद हरसैक उन्हें आईडी व पासवर्ड उपलब्ध करवाएगा। यह जानकारी हरसैक की ओर से लघु सचिवालय में आयोजित कार्यशाला में वहां के वैज्ञानिकों ने दी। कार्यशाला में जिले के तमाम विभागों के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला का उद्घाटन सिटी मजिस्ट्रेट ज्योति मित्तल ने किया। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश कुमार भी कार्यशाला में शामिल हुए।
हरसैक के वैज्ञानिक डॉ. नितिन चौहान और पवन कुमार ने जीआईएस से उपलब्ध विभिन्न विभागों से संबंधित डाटा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोई भी विभाग अपने से संबंधित शुद्ध डाटा प्राप्त करने के लिए निर्धारित मूल्य देकर आईडी और पासवर्ड प्राप्त कर सकता है। हरसैक के पास शिक्षा, चुनाव, वन, बागवानी, मत्स्य, पर्यावरण, भूजल, रेलवे, सड़क, भू रिकॉर्ड और अपराध मैपिंग से संबंधित डाटा उपलब्ध है। उपलब्ध डाटा से यह पता चल सकता है कि कौन से क्षेत्र में कितने गांव हैं और किस क्षेत्र में कितनी बंजर भूमि है। डॉ. नितिन चौहान ने बताया कि हरसैक के पास उपलब्ध डाटा से यह भी पता चल जाएगा कि कितने भू-क्षेत्र में फसल की बिजाई हुई है और कितनी पैदावार होने की संभावना है। जमीन के कौन से हिस्से में मीठा पानी उपलब्ध है, इसका डाटा भी हरसैक के पास है। राज्य भर में पराली जलने की घटनाओं के बारे में हरसैक जिलों को सूचना दे ही रहा है।
योजना बनाने में भी उपयोगी
डॉ. नितिन ने बताया कि हरसैक के पास उपलब्ध डाटा भविष्य की योजना बनाने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। डाटा इस बात में भी मदद करेगा कि सड़क कितनी चौड़ी होनी चाहिए और मकान कहां बनाए जाने चाहिए, मार्केट कहां बन सकती है। कार्यशाला में उप निदेशक दर्शन राठी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी विनोद हुड्डा, सतबीर फोगाट, योगेश कुमार व परमजीत आदि मौजूद रहे।