एमडीयू में आयोजित वैबिनार में शिरकत करते प्रतिभागी।
भविष्य डिजिटल मीडिया का है। समय की जरूरत डिजिटल स्किल्स में पारंगत होने की है। भविष्य में मल्टी स्कीलिंग व मल्टी टास्किंग कौशल के जरिये मीडिया में विद्यार्थी कामयाबी हासिल करेंगे। इसलिए पारंपरिक मीडिया से आगे सोचकर, डिजिटल कौशल हासिल कर, मीडिया उद्यमी बनने की तैयारी करें। यह गुरु मंत्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश का। वे बुधवार को एमडीयू (महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से आयोजित ऑनलाइन विशेष व्याख्यान में बोल रहे थे।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के तत्वावधान में बुधवार को कैपेसिटी बिल्ंिडग एंड करीकुलम एनरीचमेंट लेक्चर सीरीज एंड वर्कशॉप प्रारंभ हुई। कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि भविष्य में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एंड कॉमिक्स रोजगार के नए अवसर मुहैया करेंगे। डिजिटल कंटेंट डेवलपमेंट की बेहतरीन संभावनाएं होंगी। ऐसे में डिजिटल स्किल्स पर विद्यार्थियों को विशेष ध्यान देना होगा।
एमडीयू व एमसीयू भोपाल करेंगे एमओयू
उन्होंने कहा कि सर्च इंजन मार्केटिंग, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल स्टोरी टेलिंग, कंटेंट डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग, ब्रांडिंग एंड कारपोरेट कम्युनिकेशन रोजगार की नई संभावनाएं लेकर आ रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को भी अपनी सोच बदलकर, टेक्नोलॉजी पारंगत बनकर, स्वरोजगार के बारे सोचना होगा। उन्होंने क्रिटिकल थिंकिंग व प्रोब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड की वकालत की।
एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि मीडिया शिक्षण व कौशल संवर्धन के लिए एमडीयू व एमसीयू भोपाल भविष्य में एमओयू करेंगे। इससे संयुक्त रूप से भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा सकेंगे। मीडिया शिक्षा व मीडिया इंडस्ट्री के बीच सहभागिता की सख्त जरूरत है। इसी से विद्यार्थी रोजगार योग्य बनेंगे। डिजिटल मीडिया कौशल वाकई समय की जरूरत है। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को व्याख्यान शृंखला के आयोजन के लिए सराहा।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को वर्तमान मीडिया परिदृश्य से अवगत कराने व उनके कौशल विकास का रास्ता प्रशस्त करने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। मीडिया अध्ययन के विद्यार्थियों को वर्तमान की चुनौतियों के अनुरूप कौशल विकसित करने होंगे। कार्यक्रम के समन्वयक सहायक प्रोफेसर सुनित मुखर्जी ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया व कार्यक्रम का संचालन किया। सह समन्वयक सहायक प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार ने आभार प्रदर्शन किया।