रोहतक। नागरिक अस्पताल में त्वचा की 200 ओपीडी में चिकन पॉक्स के रोजाना करीब पांच मामले आ रहे हैं। चिकनपॉक्स (माता) यह एक वायरल इंफेक्शन है। यह तेजी से फैलने वाला वायरस है।
इस रोग की चपेट में सबसे अधिक छोटे बच्चे आते हैं। पांच साल व इससे कम उम्र के बच्चों में इस वायरस के सबसे ज्यादा मामले देखे गए हैं। इस वायरस से शरीर में छोटे-छोटे दाने (फाले) बन जाते हैं। फाले शुरू में छोटे होते हैं और धीरे-धीरे यह बड़े हो जाते हैं। यह दो से तीन दिन के अंतराल बढ़ते हैं। चिकन पॉक्स के साथ कई बार खुजली और बुखार भी हो हो जाता है। यह चेहरे से शुरू होकर छाती और कमर तक फैलता है। वायरस का प्रकोप बहुत ज्यादा होने पर मुंह के अंदर तालू पर पर फाले होने की संभावना रहती है। इसके अलावा सिर पर भी यह हो सकते हें।
धारणा बदलने की जरूरत
इसमें सबसे ज्यादा धारणा यह रहती है कि लोग स्नान आदि नहीं करते हैं। देसी इलाज व झाड़-फूंक कराते हैं। जो मरीज व्यक्ति के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। इसके होने पर तत्काल प्रभाव से विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलकर इसकी जांच करानी चाहिए। यह जल्दी ठीक भी जाते हैं।
शुरू के 72 घंटे रहता है ज्यादा प्रभाव
इसमें चिंता का सबसे बड़ा कारण यह रहता है कि जब किसी व्यक्ति को यह फाले बनते हैं तो यह शुरू के 72 घंटे में बहुत ज्यादा तेजी से फैलते हैं। इस दौरान संक्रमित व्यक्ति से पूरी सावधानी के साथ मिलना चाहिए। सावधानी न बरतने पर यह रोग परिवार के लोगों में फैल जाता है। गर्भवती को अगर 20 हफ्ते पहले चिकनपॉक्स हो जाए तो इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ने की संभावना रहती है।
इसका रखें विशेष ध्यान
फाले आपके हाथ से खाज करने पर फूटे न यह विशेष ध्यान रखें। फाला अगर फूट जाता है तो उसके नीचे परत बन जाते हैं और उसके नीचे निशान से बन जाते हैं। कई बार यह निशान पूरी जिंदगी तक बने रहते हें। चिकित्सक के परामर्श पर ही दवा का प्रयोग करें। परामर्श की हुई विटामिन लोशन या खुजली की दवा का प्रयोग करने से फाले वहीं रुक जाते हैं और निशान भी नहीं छोड़ते हैं।
एक्सपर्ट व्यू
चिकनपॉक्स को चिकित्सीय भाषा में वैरिसेला कहा जाता है। इलाज के लिए एंटी वायरल टेबलेट दी जाती है। जो छोटे बच्चों को तरल में दी जाती है। इसे एसाइक्लोवीर टैबलेट कहते हैं। दवा की पूरी डोज लेनी चाहिए। इसकी दवा सभी सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध है। यह एक वायरस है। इसलिए इसे किसी भ्रांतियों के साथ न जोड़ें। नियमित स्नान और साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।
-डॉ. दिनेश मलिक, त्वचा रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
चिकन पॉक्स से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार टीकाकरण कर रहा है। बच्चों को वैक्सीन दी जा रही है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना जरूरी है। इसके लक्षण नजर आते ही चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. रमेश चंद्र, सिविल सर्जन।
02सीटीके21..शरीर पर बने निशान दिखाता मरीज। संवाद