पालिका बाजार की अंडर ग्राउंड दुकान में बुधवार को शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। इससे दुकान में रखी डेढ़ लाख की नकदी व 25 लाख रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया। दमकल विभाग की टीम ने आग पर समय रहते काबू पा लिया।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन की शहर में सबसे बड़ी मार्केट के रूप में पालिका बाजार की पहचान है। यहां एक तरफ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तो दूसरी तरफ मोबाइल फोन की दुकानें हैं। इन्हीं में से अंडर ग्राउंड दुकान नंबर 127 को लकी व हितेश ने किराये पर लिया हुआ है। इसमें दोनों थोक में मोबाइल फोन के उपकरण (डिस्पले, चार्जर, ईयरफोन आदि) का कारोबार करते हैं। लकी ने बताया कि वह मोबाइल फोन के उपकरणों की थोक में बिक्री के साथ रिपेयरिंग भी करते हैं। सुबह करीब सवा आठ बजे लोगों ने दुकान से धुआं निकलते देखा तो उन्हें फोन करके इसकी सूचना दी। करीब साढ़े आठ बजे सूचना मिलते ही उन्होंने दमकल विभाग को सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया लेकिन इससे पहले दुकान में रखा करीब 25 लाख रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया। भुगतान करने के लिए रखे करीब डेढ़ लाख रुपये के नोट भी जल गए। पालिका बाजार में आग लगने की सूचना जैसे ही फैली सभी दुकानदार मौके पर पहुंच गए। कुछ ने तो सामान निकालने की भी तैयारी कर ली, लेकिन समय पर आग बुझाए जाने पर सभी ने राहत की सांस ली है।
बंद रहा पूरा बाजार
आग लगने के बाद बाजार के सभी मोबाइल फोन के विक्रेताओं ने पीड़ित दुकानदार के प्रति सहानुभूति जताने के लिए शाम तक अपनी दुकानें बंद रखी। वहीं, दुकान संचालक लकी ने आशंका जताई की संभव है कि शॉर्ट सर्किट से आग लगी हो।
जांच करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आग कैसे लगी। दुकानदार ने आग से करीब 25 लाख रुपये का सामान जलना बताया है।
- रमेश जांगड़ा, सीएफओ
पेयजल को तरसते शहर में हाइड्रेंट प्वाइंट भी नहीं
नहरी पानी के भरोसे चलने वाले शहर को गर्मियों में ही नहीं अब सर्दियों में भी कई बार पेयजल की कमी का सामना करना पड़ता है। पेयजल को तरसते शहर में आपात स्थिति में आग बुझाने के लिए हाइड्रेंट प्वाइंट तक नहीं है। इसके लिए भी दमकल विभाग को जल घर से पानी लेना पड़ता है। जबकि नियमानुसार शहर में जनसंख्या के अनुसार कई हाइड्रेंट प्वाइंट होने चाहिए। दमकल विभाग का कहना है कि फिलहाल शहर में एक भी हाइड्रेंट प्वाइंट नहीं है। शहर में पहले ये प्वाइंट थे, लेकिन सड़कों का विस्तार होता गया और ये लुप्त होते गए। अब स्थिति यह है कि शहर में कहीं भी आग लगती है तो दमकल के वाहन को जलघर से ही पानी लेना होगा।
क्या है हाइड्रेंट प्वाइंट
जलघरों से पेयजल आपूर्ति करने वाली लाइन के बराबर एक लाइन अलग से आपात स्थिति के लिए बिछाई जाती है। इस लाइन का सीधे जलघर से जुड़ाव होता है। इस लाइन के लिए जलघरों में अतिरिक्त पानी रखा जाता है ताकि जरूरत पर दमकल विभाग को पर्याप्त पानी मिल सके। इस लाइन में कोई भी घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन नहीं ले सकता है। यदि कोई इस लाइन से कनेक्शन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। इस लाइन से आपात स्थिति में दमकल के वाहन पानी लेते हैं और प्रभावित जगह पर आग बुझाने के लिए जाते हैं।
जरूरत पर यहां से दमकल लेता है पानी
दमकल विभाग का कहना है कि आग पर काबू पानी के लिए फायर टेंडरों से पानी लाया जाता है। यदि आग ज्यादा बढ़ती है, तो नजदीकी जलघर, बूस्टिंग पंप, मॉल, पार्किंग आदि से पानी भरा जाता है।
दमकल विभाग के पास संसाधन
दमकल विभाग के पास करीब 9 फायर टेंडर हैं। इनमें से पांच फायर टेंडर मानसरोवर पार्क कार्यालय में हैं। तीन सेक्टर पांच और सांपला में एक है।