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किसान आंदोलन : 380 वें दिन झूमते - नाचते, जश्न मनाते धरतीपुत्र रवाना, हर तरफ लहराया किसानी झंडा

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जीटी रोड पर सोनीपत के लोगों का धन्यवाद करके जाते हुए किसान। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत/बहादुरगढ़ । संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक आंदोलन के 380वें दिन शनिवार सुबह किसानों ने कुंडली, टीकरी और सिंघु बॉर्डर से वापसी शुरू कर दी। इससे पहले उन्होंने धरनास्थल पर जमकर जश्न मनाया और जीत के नारों व धूम धड़ाके के बीच फतेह मार्च निकाला। कुंडली बॉर्डर से लेकर मुरथल तक ट्रैक्टर-ट्रालियों, कारों व जीपों के काफिले के कारण माहौल देखते ही बनता था। उधर, किसानों की रवानगी से टीकरी बॉर्डर भी लगभग खाली सा हो गया है।
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पंजाब के किसानों को विजयी विदाई देने व फतेह मार्च में शामिल होने के लिए केजीपी - केएमपी के जीरो प्वाइंट पर भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा दूरदराज से भी किसान पहुंचे। इस दौरान किसानों पर पुष्प वर्षा की गई। ट्रैक्टर - ट्रालियों पर पूरा दिन अलग-अलग जत्थों में किसान रवाना होते रहे, जिससे जीटी रोड पर लंबा जाम लगा रहा।
किसानों ने लहराई बंदूक, भिंडरवाला के पोस्टर फिर दिखे
जश्न के बीच कुछ किसानों ने अति उत्साह में विजयी मुद्रा में ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर हाथों में बंदूक लहराई। हालांकि, इस दौरान कोई फायर नहीं किया गया। वहीं, एक बार फिर एक किसान के हाथों में खालिस्तानी समर्थक भिंडरावाला का पोस्टर दिखाई दिया। एक किसान भिंडरावाला का पोस्टर लेकर दूसरे किसानों की अगुवाई कर रहा था। हालांकि, उसने इस बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। मगर बाद में किसानों ने समझाकर पोस्टर उससे लेकर गायब कर दिया।
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उधर, रवानगी से पहले टीकरी बार्डर पर किसानों ने अपने ट्रैक्टर, कारों व अन्य वाहनों की दुल्हन की तरह सजाया था। एक ट्रैक्टर को सजाने के लिए डेकोरेटरों ने 300 से 500 रुपये लिए। टीकरी बार्डर से किसान दो काफिलों में रवाना हुए हैं। इनमें एक जींद की तरफ से पटियाला और दूसरा हांसी - हिसार होते हुए बठिंडा जाएगा। इन रूटों में जींद की ओर से जाने वाले किसान टीकरी बॉर्डर से रोहतक, जींद, उचाना व नरवाना से होते हुए पंजाब में पटियाला पहुंचेंगे। घर वापसी से पहले किसानों ने खूब जश्न मनाया।
खूब आतिशबाजी की
पोटाश से देसी जुगाड़ से बनाई गई पटाखा गन का प्रयोग किया और खूब आतिशबाजी की। उधर, ढांसा बार्डर पर सुबह ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई। गुलिया खाप के प्रधान विनोद बादली ने नेतृत्व करते हुए सभी किसानों को पगड़ी बांधकर घर वापसी के साथ अपने एक साल से रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
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