रोहतक। बढ़ती महंगाई के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर गए। उन्होंने गैस सिलिंडर हाथों में उठाकर शहर में जुलूस निकाला। भीड़ को देख पुलिस ने सचिवालय गेट बंद किया तो कार्यकर्ता गेट पर चढ़ गए। खूब धक्का मुक्की हुई और कांग्रेसी गेट खोलकर अंदर घुस गए और परिसर में सरकार विरोधी जमकर नारेबाजी की। बाद में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन नगराधीश को दिया। लौटते वक्त सचिवालय के बाहर सड़क पर बैठकर नारेबाजी की जिससे कु छ देर जाम लगा रहा।
शहर विधायक भारत भूषण बत्रा, कलानौर विधायक शकुंतला खटक और महम के पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसियों ने शहर में जुलूस के रूप में निकले। विधायक शकुंतला अपने कंधे पर गैस सिलिंडर उठाकर विरोध जता रही थी। कांग्रेस कार्यकर्ता शहर में भ्रमण करते हुए सचिवालय पहुंचे। भीड़ को देख सचिवालय का गेट पहले ही बंद कर लिया था, लेकिन कांग्रेसी गेट पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए गेट खेलकर अंदर घुस गए। डीसी कार्यालय के बाहर सचिवालय परिसर में ही उन्होंने केंद्र सरकार विरोध जमकर नारेबाजी की। विधायक भारत भूषण बत्रा ने कहा कि केुंद्र सरकार ने महंगाई की सभी हदें पार कर दी हैं। समाज का हर वर्ग परेशान हैं। मध्यम वर्गीय परिवार को घर चलाना मुश्किल हो गया। विधायक शकुंतला ने कहा कि सरकार के भारी भरकम टैक्स की वजह से ही तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। ये सरकार सिर्फ झूठे सपने दिखाती है।
नगराधीश मोहित महराना ने पहुंचकर उनका ज्ञापन लिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता वापस लौट गए लेकिन सचिवालय के बाहर सड़क पर ही बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। जिससे वहां मार्ग बाधित हो गया। जाम लगता देख पुलिस कर्मी वहां पहुंचे लेकिर कांग्रेस कार्यकर्ता सरकारी विरोध नारेबाजी करते हुए लौट गए। इस मौके पर पार्षद गुलशन इशपुनियानी, कदम सिंह अहलावत, पूर्व पार्षद सुरेंद्र बतरा, मोनू शर्मा, पंकज सचदेवा रोमी ग्रेवाल, अमर अरोड़ा, देवेंद्र, भारत, कुलदीप, हेमेंत बख्शी आदि शामिल रहे।
कांग्रेसियों ने इन मुद्दों पर केंद्र को घेरा
कांग्रेेस विधायकों द्वारा दिए गए ज्ञापन में कई तथ्यों पर भाजपा सरकार को घेरा था। इसमें बताया कि जबसे भाजपा ने सत्ता संभाली उस समय पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रुपये और डीजल पर 3.46 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क था। इसमें भाजपा सरकार ने पेट्रोल में 18.70 और डीजल में 18.34 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। 2014-15 से वर्ष 2021-22 तक आठ साल की अवधि में केंद्र सरकार ने कई बार पेट्रोल और डीजल के रेट में बढ़ोत्तरी कर जनता से आठ साल में 26 लाख करोड़ वसूले हैं। दो साल पहले 22 मार्च 2020 को पेट्रोल 69.59 रुपये और डीजल 62.29 रुपये लीटर था, जो अब बढ़कर क्रमश: 96.21 और 87.47 रुपये हो गया है। 26 मई 2014 पीएम मोदी के सत्ता संभालने पर कच्चा तेल अमेरिकी डॉलर प्रति लीटर प्रति बैरल मिल रहा था और आज भी 108.25 रुपये प्रति बैरल मिल रहा है। उस समय पेट्रोल 69.59 और डीजल 62.29 रुपये प्रति लीटर था, जबकि अब क्रमश: 96 और 87 रुपये लीटर से अधिक है। पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2012-13 में 1.64 करोड़ से अधिक की सब्सिडी तेल और गैस पर लोगों को दी थी जिसे केंद्र की भाजपा 2020-21 में 11 हजार पर ले आई। सरकार इसी तरह कांग्रेसियों ने रसोई गैस की कीमतों के तथ्यात्मक आंकडे़ देकर यूपीए और भाजपा सरकार के समय में तुलना करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने टैक्स की मार से लोगों की कमर तोड़ी है।