मंच से संबाेधित करते सीएम मनोहर लाल।
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अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने विद्यार्थी जीवन की यादों व संघर्ष को भी याद किया। रोहतक के एमडीयू के सभागार में प्रदेश भर से आए टॉपर छात्र व छात्राओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए काफी संघर्ष किया।
वे कभी एमडीयू का हिस्सा रहे पंडित नेकीराम कॉलेज में दाखिल लेना चाहते थे, लेकिन खेतीबाड़ी कर रहे पिता के पास पैसे नहीं थे। मैं मां के पास गया, बोला आगे पढ़ना चाहता हूं। मां ने कई साल एक-एक रुपया जोड़कर जो पैसे एकत्रित किये थे, उनमें से 300 रुपये निकाल कर दिए। बोली, बेटा जाओ दाखिला ले लो।
जब उन्होंने दाखिला ले लिया तो पिता को पता चला। पिता ने सोचा, अगर अब मनोहर को नहीं पढ़ाऊंगा तो 300 रुपये का नुकसान हो जाएगा। वे भी पढ़ाने के लिए मान गए और हर सप्ताह 10 रुपये के हिसाब से प्रति माह 40 रुपये देने लगे।
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मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति के महत्व व छोटे-छोटे सम्मान का महत्व बताते हुए कहा कि 40 रुपये में पढ़ाई का खर्च नहीं निकल पा रहा था। साइंस लैब अटेंडेंट की सलाह पर ऋण छात्रवृत्ति योजना का फॉर्म भरा, जिससे 480 रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति मिली। उस छात्रवृत्ति ने खाद व पानी का काम किया, जिसके चलते आज आपके सामने खड़ा हूं।
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निंदाना गांव में हुआ था सीएम का जन्म, बलियानी में बीता बचपन
मुख्यमंत्री मनोहर भले ही करनाल से विधायक हैं, लेकिन उनका जन्म रोहतक जिले में महम उपमंडल के गांव निंदाना में हुआ था। बाद में उनका परिवार कलानौर खंड के गांव बनियानी में आ गया। बाद में उन्होंने रोहतक के नेकीराम कॉलेज में दाखिला ले लिया।