प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस के अपने हालात नासाज बने हुए हैं। अस्पताल को अपनी सेहत सुधारने के लिए बजट की दरकार है तो कर्मचारियों को भी वेतन का इंतजार है। नए वित्त वर्ष में अब तक संस्थान को बजट नहीं मिलने और वीआरएस लेने का दर्द झेल रहे हड्डी रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति के समक्ष बयां कर चुके हैं। अब कर्मचारियों में भी वेतन नहीं मिलने के कारण रोष पनप रहा है। बुधवार को वेतन के लिए गैर शिक्षक संघ ने स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति प्रो. अनीता सक्सेना से मुलाकात की।
पीजीआई के हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं। यही हाल रहा तो संस्थान में गंभीर स्थिति बन सकती है। प्रबंधन व सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो हालात बद से बदतर बनना तय है। इसकी वजह संस्थान को बजट नहीं मिलना है। नए वित्त वर्ष का पहला माह बीत चुका है। दूसरे माह के भी दस दिन गुजर चुके हैं। हालात ये हैं कि अप्रैल का वेतन संस्थान के कर्मचारियों को अब तक नहीं मिला है। यह वेतन फिलहाल 15 मई के बाद ही मिलने की उम्मीद है। यह भी तब संभव होगा, जब बजट संस्थान के पास पहुंच जाएगा। वेतन नहीं मिलने से संस्थान के कर्मचारियों में रोष पाया जा रहा है।
सरकारी ही नहीं अनुबंधित कर्मचारी भी आहत
पीजीआई के सरकारी कर्मचारी ही नहीं अनुबंधित कर्मचारी भी वेतन नहीं मिलने से आहत हैं। संस्थान में अनुबंध पर कार्यरत 81 फार्मासिस्ट, 71 डाटा एंट्री ऑपरेटरों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। ये कर्मचारी रोज निर्धारित समय पर आते हैं, काम करते हैं और लौट जाते हैं। महीने के अंतिम दिन वेतन मिलने का इंतजार रहता है। यह इंतजार पिछले दो महीने से बरकरार है। वेतन नहीं मिलने से इन कर्मचारियों में रोष है। इस संबंध में कंपनी के अधिकारी से बात करने पर पता लगा कि संस्थान ने बजट की कमी के चलते बिल पास नहीं किए हैं। इस कारण वेतन भी जारी नहीं हो रहा है।
क्यों नहीं मिलता समय पर पूरा बजट
पीजीआई के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरसी सिवाच 30 अप्रैल को वीआरएस लेकर संस्थान को अलविदा कह चुके हैं। अपनी सेवानिवृत्ति पर इन्होंने स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति व अन्य अधिकारियों के सामने मंच से संस्थान की अव्यवस्था का मुद्दा उठाया था। संस्थान में काम नहीं करने के माहौल के अलावा बजट किल्लत को लेकर बार-बार गहराने वाली समस्या पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि संस्थान में बजट व्यवस्था के लिए तीन कर्मचारी इसी काम के लिए हैं। इसके बावजूद बार-बार बजट मांगना पड़ता है। क्यों नहीं एक ही बार पूरा बजट मिल जाता। खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं है।
पिछले वर्ष भी प्रदर्शन के बाद मिला था बजट
संस्थान में बजट की समस्या पिछले वर्ष भी बनी थी। उस समय कर्मचारियों ने तत्कालीन कुलपति निवास का घेराव किया था। गुस्साए कर्मचारियों के प्रदर्शन व घेराव के बाद बजट को लेकर प्रयास किया गया। इसके बाद कर्मचारियों को वेतन मिला। इस बार फिर वही स्थिति बन रही है। इसी कड़ी में बुधवार को यूएचएस गैर शिक्षक संघ के प्रधान तारीफ सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति प्रो. अनीता सक्सेना से मुलाकात की। यहां उन्हें वेतन संबंधी समस्या से अवगत कराते हुए समय पर कर्मचारियों को वेतन मुहैया कराने की अपील की गई। इस पर कुलपति ने लेखा शाखा से संपर्क कर बजट समस्या की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद सरकार एसीएस से फोन पर बात कर बजट किल्लत से शीघ्र निजात दिलाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर सुरेंद्र राणा, अनीश अरोड़ा, संजीव भारद्वाज, वजीर शर्मा, विनोद राव, नरेंद्र चौहान, राजेश ढांडा, अमित अहलावत, मलकीत व कृष्ण शर्मा शामिल रहे।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान के कर्मचारियों का वेतन समय पर न मिलना बेहद चिंताजनक विषय है। पीजीआई स्टाफ दिन-रात इलाज में तत्पर रहता है, लेकिन वेतन के मामले में अक्सर देरी पीड़ादायक है। संस्थान व सरकार से निवेदन है कि जल्द पीजीआई के लिए बजट आवंटित करे, ताकि समस्या का निदान हो सके।
संजय सिंहमार, महासचिव, यूएचएस गैर शिक्षक संघ।
वित्त वर्ष समाप्त होने पर थोड़ी समस्याएं हो जाती हैं। किसी को वेतन नहीं मिला है, इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई है। संस्थान को बजट अलोकेट हो गया है। जल्दी ही संस्थान को मिल भी जाएगा। इसके बाद सभी समस्याओं को समाधान कर दिया जाएगा। डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस।