लघु चिड़ियाघर में बाघिन आशा ने करीब तीन माह पहले दो बच्चों को जन्म दिया है। इसमें एक नर और दूसरा मादा है। चिड़ियाघर में बंगाल टाइगर सागर के शावकों की सुरक्षा और सेहत का बाघिन आशा ख्याल रख रही है। अब सागर और आशा का परिवार पांच सदस्यों का हो गया है। लॉकडाउन खुलने के बाद लोग इन बाघ के बच्चों की अठखेलियां देख सकेंगे। वहीं, यहां तेंदुए के दो शावक भी मौजूद रहेंगे। चिड़ियाघर में शावकों को लोगों की नजरों से ही नहीं, बल्कि बाघ पिता सागर से भी अलग रखा गया है। ऐसा उनकी सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है। इनके व्यस्क होने तक बाघिन मां आशा ही शावकों की देखभाल करेगी। चिड़ियाघर प्रशासन शावकों का विशेष देखभाल कर रहा है। चिड़ियाघर में चिकित्सक व उन्हें खाना देने वाले के अलावा किसी अन्य को उनके बांड़े (एनक्लोजर) के पास जाने के लिए प्रतिबंधित कर रखा है।
पिछले साल दिया था एक शावक को जन्म
लघु चिड़ियाघर में करीब दो साल पहले ही बंगाल टाइगर सागर को लाया गया था। टाइगर सौरभ की मौत के बाद से यह बाड़ा (एनक्लोजर) खाली था। यहां सागर को साथी के रूप में आशा का साथ मिला। लॉकडाउन के कारण लोगों के शोरगुल से दूर शांत माहौल में साथ रहे जोड़ने ने अपना परिवार बढ़ाया। आशा ने पिछले साल एक नर शावक को जन्म दिया था। इस साल दो शावकों के जन्म के साथ इस परिवार में पांच सदस्य हो गए हैं।
तेंदुआ परिवार में जन्मे थे दो शावक
चिड़ियाघर में शामिल तेंदुआ सनी व दुर्गा के जोड़े ने भी पिछले साल लॉकडाउन में अपना परिवार बढ़ाया है। दुर्गा ने दो शावकों को जन्म दिया था। अब ये भी करीब साल भर के हो गए हैं। लघु चिड़ियाघर में पहली बार बाघों के साथ तेंदुए के जोड़े ने भी अपना परिवार बढ़ाया है। इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था।
लॉकडाउन में लघु चिड़ियाघर के बाघ परिवार का विस्तार हुआ है। मादा आशा ने दो शावकों को जन्म दिया है। इन्हें बाघ सागर से अलग रखा गया है। साथ ही उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। आमजन को इनके बाड़े (एनक्लोजर) की ओर जाने पर प्रतिबंध किया गया है। महामारी के चलते यहां साफ-सफाई व अन्य बातों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
-शिव रावत, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी