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दिवाली से पहले ही एक्यूआई 300 पार

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मौसम में आए बदलाव ने दिवाली से पहले ही हवा में प्रदूषण के स्तर को बढ़ाना शुरू कर दिया है। सड़कों पर वाहनों व लोगों की भीड़ ने हवा में मौजूद धूल कणों को अव्यवस्थित कर दिया है। हालात ये हैं कि एक्यूआई 318 के हानिकारक स्तर तक पहुंच गया है। ऐसे में दिवाली पर आतिशबाजी हुई तो कोरोना पीड़ितों, सांस, दमा व अस्थमा मरीजों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।
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त्योहारी सीजन में वाहनों में सवार होकर खरीदारी करने निकली भीड़ ने बाजार की रौनक बढ़ा दी है। वहीं, इस रौनक के साथ प्रदूषण का खतरा भी बढ़ने लगा है। हालांकि इसमें वाहनों का धुआं, भवन निर्माण, सड़कों पर उड़ती धूल समेत कई कारण शामिल हैं। प्रदूषण का असर दिवाली से पहले ही नजर आने लगा है। हवा की गुणवत्ता हर दिन बिगड़ती जा रही है। सोमवार को एक्यूआई का 300 पार तक पहुंच गया। इसका दिन भर का औसत 260 दर्ज किया गया। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यही नहीं, दिवाली पर प्रदूषण और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पटाखों का धुआं स्थिति को और बिगाड़ने का काम करेगा। दिवाली पर आतिशबाजी हुई तो हानिकारक गैसों का स्तर हवा में कई गुणा बढ़ जाएगा। इससे आम लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस परिस्थिति में कोविड मरीज, दमा व सांस के रोगियों की हालत का अनुमान लगाया जा सकता है।
ठंड बढ़ने पर गहराएगा स्मॉग
आने वाले दो दिनों में ठंड और बढ़ने वाली है। इससे हवा में नमी की मात्रा बढ़ जाएगी। हवा में नमी और पटाखों का धुआं मिलने से स्मॉग छाएगा। कोहरे जैसी दिखने वाली स्मॉग की चादर न केवल सांस लेने में परेशानी करेगी, बल्कि सड़क पर चलता तक मुश्किल हो जाएगा।
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आज व कल बूंदाबांदी के आसार
एचएयू के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएल खीचड़ ने बताया कि प्रदेश में आमतौर पर मौसम 6 नवंबर तक परिवर्तनशील व खुश्क बना रहेगा। इस बीच एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक प्रभाव नजर आ सकता है। यह दो से तीन नवंबर को उत्तरी हरियाणा के आंशिक बादलवाई व छिटपुट बूंदाबांदी कर सकता है। इसके बाद तीन नवंबर से उत्तर पश्चिमी हवाएं चलेंगी। इससे रात के तापमान में गिरावट आएगी। सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री व न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसमें दो दिन बाद कमी आएगी।
मौसम में बदलाव जारी है। ठंडे मौसम में प्रदूषण बढ़ने लगा है। आतिशबाजी से यह समस्या और बढे़गी। इससे कोविड, सांस व दमा रोगियों की मुश्किल बढ़ जाएगी। इससे बचने के लिए आतिशबाजी व प्रदूषण रोकने की जरूरत है। इस ओर सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
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- डॉ. इंदु, जिला क्षय रोग अधिकारी, रोहतक
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