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‘पांच राज्यों के चुनाव में सफाया होता देख वापस लिया कृषि कानून’

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कैंडल मार्च निकालते पूर्व विधायक कृष्‍ण मूर्ति हुड्डा और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता। अमर उजाला
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पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा का सफाया होता देख तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की गई है। किसानों का एक साल का संघर्ष और करीब 800 किसानों की कुर्बानी काम आई है। ये बात शनिवार को पूर्व मंत्री सुभाष बतरा व पूर्व मंत्री कृष्ण मूर्ति हुड्डा ने जिला कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संयुक्त बयान में कही।
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पूर्व मंत्री कृष्ण मूर्ति हुड्डा ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव में सफाया होता देख कृषि कानूनों को वापस लिया गया है। खासतौर से उत्तर प्रदेश और पंजाब में हो रहे विरोध को देखते हुए यह घोषणा हुई है। मिजोरम के राज्यपाल सतपाल मलिक भी किसानों के समर्थन में हैं। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के अधिकारी के पास करोड़ों रुपये मिले हैं, जिससे सरकार की हकीकत सामने आ गई है। यह मामला तो पर्ची व खर्ची से ऊपर है। इस मामले को सरकारी एजेंसी रफा-दफा करने का काम करेगी। इसलिए हाईकोर्ट के जज से जांच करवाई जाए। वहीं पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने कहा कि कृष्ण मूर्ति हुड्डा की बात का मैं समर्थन करता हूं। मैं पूछना चाहता हूं कि मरने वाले किसानों का जिम्मेदार कौन है। प्रजातंत्र में संवाद से हर समस्या का निदान होता है। प्रधानमंत्री कहते थे कि एक किमी. की दूरी है मगर किसानों से कोई संवाद नहीं किया। इससे सूबे में टोल से भारी नुकसान हुआ है। आज हर चीज महंगी हो गई है। गरीबों का पेट भरना मुश्किल हो गया है। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के अधिकारी पर करोड़ों रुपये मिलने से सरकार की विश्वसनीयता कटघरे में हैं। किसानों ने संसद में प्रस्ताव पास नहीं होने तक धरने से नहीं उठने का फैसला लिया है, जो सही है।
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