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जिले में 4554 प्रतिष्ठानों के पास है खाद्य सामग्री बेचने का अधिकार

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त्योहारी सीजन में खाने पीने के शौकीनों को सतर्क रहना जरूरी है। लोग खाद्य सामग्री को पहले उसके खाने लायक होने की पुष्टि जरूर कर लें। कहीं ऐसा न हो आप बीमार पड़ जाएं। यह हम नहीं, व्यवस्था बयां कर रही है। जिले में ज्यादातर खाद्य सामग्री फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के नियमों के विरुद्ध बेची जा रही हैं। इनके पास खाद्य सामग्री बेचने का न लाइसेंस है न पंजीकरण। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में खड़ी है। एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेेशन) विभाग की मानें तो जिले में 4554 खाद्य सामग्री विक्रेताओं के पास ही खाद्य सामग्री बेचने का अधिकार है।
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जिले में कहने को हजारों प्रतिष्ठान हैं। इनमें मिठाई विक्रेता, होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, कैफे संचालक, चाय की दुकान, आईस्क्रीम पार्लर, दूध विक्रेता, दूध से बने उत्पाद बेचने वाले व अन्य शामिल हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत इन सभी के पास खाद्य सामग्री बेचने की अनुमति होनी चाहिए। इसके लिए एफडीए विभाग 12 लाख रुपये सालान टर्नओवर वाली फर्म का पंजीकरण करता है व 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर से अधिक वाली फर्म को लाइसेंस जारी करता है। जिले में ज्यादातर खाद्य विक्रेताओं ने न तो पंजीकरण कराया है न लाइसेंस बनवाया है। इसके बावजूद खाद्य सामग्री बेची जा रही है। यह सामग्री आपका स्वास्थ्य बिगाड़ सकती है। इसलिए बेहतर है कि आप पंजीकरण व लाइसेंस धारक फर्म से ही खाद्य सामग्री खरीदें। जिले में कुल 4554 फर्में पंजीकृत व लाइसेंस धारक हैं। इनमें से 800 के पास लाइसेंस है व 3754 का पंजीकरण है।
एफडीए विभाग लेता है सैंपल
खाद्य सामग्री की गुणवत्ता कैसी है, यह स्वास्थ्य की दृष्टि से जानना जरूरी है। इसके लिए एफडीए विभाग यह जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। विभाग को हर माह खाद्य सामग्री के करीब 30 सैंपल भरने होते हैं। इसी कड़ी में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग सैंपलिंग कर रहा है। त्योहारी सीजन में टीम खाने-पीने के सामान के सैंपल ले रहा है। इन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
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फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत सभी प्रकार की खाद्य सामग्री विक्रेताओं के लिए पंजीकरण कराना या लाइसेंस लेना जरूरी है। नियम अनुसार तय मानदंडों के आधार पर पंजीकरण व लाइसेंस देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जिले में 4554 फर्मों में पास लाइसेंस व पंजीकरण कराया है। विभाग के पास फाइल आते ही मौके का मुआयना कर पंजीकरण या लाइसेंस की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। ऐसा नहीं करने वाली फर्मों पर कार्रवाई की जाती है। एफडीए की टीम सैंपलिंग के साथ फर्मों के पंजीकरण व लाइसेंस भी जांचेगी।
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- ओमकार, डेजिग्नेटेड ऑफिसर, एफडीए।
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