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अभिषेक के खिलाफ 88 दिन में 400 पेज की चार्जशीट दाखिल, दोस्त के खिलाफ सुबूत नहीं

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शहर के विजय नगर हत्याकांड में आरोपी अभिषेक उर्फ मोनू मलिक के खिलाफ पुलिस ने 88 दिनों में कोर्ट में 400 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में अभिषेक को ही आरोपी बनाया गया है, जबकि उसके दोस्त के खिलाफ पुलिस को अभी तक सुबूत नहीं मिले हैं। आरोप पत्र में साफ किया गया है कि अगर दोस्त के खिलाफ सुबूत मिलते हैं तो उसके खिलाफ जांच की जाएगी।
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अदालत में दाखिल चार्जशीट में बताया गया है कि 27 अगस्त को सूचना मिली कि विजय नगर में प्रॉपर्टी डीलर प्रदीप मलिक उर्फ बबलू पहलवान, उसकी पत्नी बबली, बेटी नेहा व सास रोशनी को गोली मारी गई हैं। पुलिस मौके पर पहुंची तो बबलू, बबली व रोशनी का शव मिला, जबकि नेहा को पीजीआई ले जाया जा चुका था। हालांकि दो दिन बाद नेहा की भी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल की तो बबलू मलिक के बेटे अभिषेक उर्फ मोनू मलिक (20) से शक के आधार पर पूछताछ की। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मोनू अपने दोस्त के साथ रहना चाहता था। दोस्त को देने के लिए पांच लाख रुपये पिता से मांगे। पिता ने इनकार कर दिया। इसी के चलते उसने अपने पिता की 32 बोर की अवैध रिवाल्वर से चारों को गोली मार दी। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत के चलते सुनारिया जेल में बंद है।
एफएसएल रिपोर्ट को अहम सुबूत मान रही पुलिस
अदालत में दाखिल आरोप पत्र में पुलिस ने 37 लोगाें को गवाह बनाया है, जिसमें पुलिस कर्मी व आम लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा पिस्तौल की एफएसएल रिपोर्ट व फोरेंसिक रिपोर्ट को अहम सुबूत माना जा रहा है। हालांकि आरोपी के वकील शिवराज मलिक पहले ही पुलिस की जांच पर सवाल उठा चुके हैं। यहां तक कि मामला हाईकोर्ट में जा चुका है। हाईकोर्ट की ओर से 7 दिसंबर तक पुलिस से जांच के संबंध में शपथ पत्र मांगा गया है।
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धारा 120बी व 34 को हटाया
पुलिस की ओर से आरोप पत्र केवल अभिषेक के खिलाफ दायर किया गया है, जिसमें आईपीसी की धारा 302 व आर्म्स एक्ट ही लगाया गया है। केस से धारा 120बी व 34 को हटा दिया गया है। पुलिस की तरफ से आरोपी की गिरफ्तारी के समय दाखिल आरोप पत्र में दोनों धाराओं का जिक्र था।
आरोपी की अदालत में पेशी आज
वहीं, न्यायिक हिरासत के चलते सुनारिया जेल में बंद आरोपी अभिषेक उर्फ मोनू मलिक की सोमवार को अदालत में पेशी होगी। अभी आरोप तय न होने के कारण आरोपी को दोबारा 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।
पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए वारदात के तीन माह पूरे होने से पहले ही 88 दिन में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। अब आगे की कार्रवाई अदालत में चलेगी।
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- कृष्ण कुमार, एएसपी
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