हरियाणा के रेवाड़ी शहर स्थित बाल देखरेख संस्थान से दो बच्चे भाग गए। इसकी भनक तब लगी जब शनिवार की सुबह बच्चों की गिनती शुरू हुई। इसके बाद संस्थान के अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। शहर थाना पुलिस दोनों बच्चों की तलाश में जुटी है। दोनों रात में खिड़की खोलकर छत के रास्ते भाग गए।
हाईकोर्ट की जज भी कर चुकी निरीक्षण
6 मार्च 2021 को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश लीजा गिल ने शहर के बाल देखरेख संस्थान का निरीक्षण किया था। उन्होंने बच्चों से मुलाकात की थी। जिला बाल कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए थे कि बच्चों की सुरक्षा और उनके रहने आदि पर विशेष ध्यान जाए। उनको किसी भी तरह की परेशानी न आने दें।
1994 में शुरू हुआ था आस्था कुंज
जिला बाल कल्याण अधिकारी वीरेंद्र यादव ने बताया कि बाल देखरेख संस्थान की स्थापना सन 1994 में हुई थी। जिले में बच्चों के पालन-पोषण के लिए तीन अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई है। कैटेगरी में 0 से 4 साल के 4 बच्चे, बाल गृह में 6 से 18 साल तक के 29 लड़के व धारूहेड़ा स्थित आशा किरण में 34 लड़कियां रहती हैं। इन सभी बच्चों का खाने-पीने व पढ़ाई का खर्च महिला एवं बाल विकास विभाग वहन करता है। सभी बच्चे यहां के अग्रसेन स्कूल में पढ़ते हैं। बाल देखरेख संस्थान में 15 लोगों का स्टाफ है जो बच्चों की देखरेख करता है।
केंद्र से सुबह सूचना मिली थी कि दो बच्चे कहीं चले गए हैं। इनकी तलाशी के लिए पुलिस को शिकायत दी गई है। ये दोनों बच्चे ही कुछ दिन पहले ही यहां आए थे। - मुग्धा यादव, केंद्र अधीक्षक, बाल देखरेख संस्थान
मंजीत को सिंगर बनने का शौक
बाल देखरेख संस्थान की अधीक्षक मुग्धा यादव ने बताया कि झज्जर जिले का रहने वाला मंजीत 8 जुलाई को ही आया था। बच्चा पहले भी कई बार घर से भाग चुका है। सिंगर बनने के लिए वह मुंबई भाग गया था। किसी संस्था की मदद से वह यहां पहुंचा। उसके बाद से ही वापस जाने की जिद कर रहा था। इसके परिजनों को भी कई बार बुलाया गया, लेकिन वे उसे लेने नहीं पहुंचे। रात के वक्त सभी बच्चे सोए हुए थे। तभी वह 10 साल के दूसरे बच्चे सोहेल को बहला फुसलाकर खिड़की के रास्ते भाग निकला। इसकी शिकायत पुलिस को दे दी गई है।