मेले में पशु खरीद करते व्यापारी व आए मवेशी।
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कोसली। कोसली का ऐतिहासिक पशु मेला जिले के पशु मेलों में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां हजारों की संख्या में हरियाणा के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी व्यापारी पशु खरीद के लिए आते हैं। लेकिन सुरक्षा व सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है।
पशु मेले में उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में पशुपालक मुर्राह नस्ल की भैंसों की खरीद करने आते हैं। कोसली का पशु मेले में हजारों की संख्या में व्यापारी करोड़ों रुपये की राशि लेकर मेले में आए हुए हैं। हर वर्ष गोगा नवमीं पर लगने वाले मेले से सरकार को राजस्व के रूप में लाखों रुपये प्राप्त होते हैं। मेला प्रबंधक बीडीपीओ साहिल ने बताया कि उन्होंने मेले में सभी प्रबंध पूरे कर रखें। अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह उनसे मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। पीने का पानी टैंकरों से आ रहा है। पशुओं के पानी के लिए गांव कान्हडवास का जोहड़ में बारिश का पानी भरा है।