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दो विभागों की लड़ाई में अंधेरे में डूबा शहर

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शहर की तमाम सड़कों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें इस समय बंद पड़ी हुई हैं। शाम ढलते ही पूरा शहर अंधेरे में डूब जाता हैं। शहर यूं ही अंधेरे में नहीं डूब रहा है बल्कि इसे इस हालत में पहुंचाने के लिए सीधे तौर पर दो विभाग जिम्मेदार हैं। सबसे अहम जिम्मेदारी निभाई है स्ट्रीट लाइट को लगाने वाले लोक निर्माण विभाग ने और अब मोर्चा संभाले हुए हैं नगर परिषद जो इन लाइटों को अपने अधीन नहीं ले रही है। लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद दोनों ही विभागों का कहना है कि स्ट्रीट लाइटें उनके अधीन नहीं है इसलिए शहर की स्ट्रीट लाइट अब लावारिस हो गई है।
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शहर को बेहतर बनाने के लिए यहां की सड़कों पर आधुनिक एलईडी लाइटें करीब तीन साल पूर्व लगाई गई थी। तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह शहर की सड़कों पर बेहतर से बेहतर लाइट लगवाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने 2 से ढाई लाख रुपये की कीमत वाली लाइटें सर्कुलर रोड व गढ़ी बोलनी रोड पर लगवाई। लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने उनके इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से मिट्टी में मिला दिया। करोड़ों खर्च करके जिन लाइटों को लगाया गया था सालों बाद भी वह सहीं से चल नहीं पाई है। ऐसा लग रहा है मानो इन लाइटों के खेल में भ्रष्टाचार हो गया और किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगी। पहले प्रदेश सरकार की नई पॉलिसी के तहत लाइटों के लिए अलग से मीटर लगाने को लेकर ढाई साल तक पेंच फंसा रहा। अब लाइट किसके अधीन है इसको लेकर विवाद चल रहा है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से लाइट को नगर परिषद को दे दिया है। लेकिन नगर परिषद का कहना है कि उन्होंने लाइटों को अभी अपने अधीन नहीं लिया है। शहर में बहुत जगह तो स्ट्रीट लाइट के पोल भी गिर गए हैं। अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे शहर में लगाई गई करोड़ों की लाइटें महज शोपीस है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से सर्कुलर रोड, गढ़ी बोलनी रोड के अतिरिक्त रेवाड़ी-नारनौल रोड, रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ रोड व रेवाड़ी बेरली रोड पर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी। इनमें से एक भी सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही जिससे शहर में अंधेरा छाया रहता है। शहरी क्षेत्र में लगी इन लाइटों को लोक निर्माण विभाग को नगर परिषद के अधीन करना था लेकिन दोनों विभागों के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। नप का तर्क है कि लोक निर्माण विभाग जब सभी लाइटों को चालू हालत में देगा तभी उसे लेंगे और लोक निर्माण विभाग का कहना है कि उनकी लाइटें ठीक है अब नगर परिषद ही संभाले तो बेहतर हैं।
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लाइटों को लेकर हमारी टीम कई बार की टीम के नप की टीम के साथ विजिट कर चुकी है। कुछ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मौखिक तौर पर यह कहा जा चुका है कि लाइट नप के अधीन रहेंगी। लिखित तौर पर हम अपने अधिकारियों को भी लाइट हैंडओवर करने की जानकारी दे चुके हैं। बिजली बिलों के साथ आम आदमी जो स्ट्रीट लाइट चार्ज देते हैं वह नप के खजाने में ही जाता है। उनके पास पूरी टीम है जो इन लाइटों को संभाल सकती हैं। -भूदेव, कनिष्ठ अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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लाइटों को हमने अपने अधीन लिया ही नहीं है। लोक निर्माण विभाग को इन लाइटों को चालू हालत में ही हमें देना है। जब यह लाइटें ठीक होंगी तब हम इनको लेंगे।
-पूनम यादव, नगर परिषद चेयरपर्सन
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