बिना दहेज के शादी करने पर वाले नवदंपति परिजनों के साथ।
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दिखावे के इस दौर में लाखों का दहेज लेकर शाही अंदाज में शादी करने की होड़ लगी है। ऐसे में रेवाड़ी के विजय नगर निवासी पूर्व नौसैनिक ने कन्यादान और गोदान की मिसाल कायम कर समाज के लिए मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने इंजीनियर बेटे की शादी में न केवल एक रुपया और नारियल लेकर दुल्हन को लक्ष्मी रूप में स्वीकार किया, अपितु गोशाला में एक लाख रुपये का दान देकर गोमाता के लिए दिए गए दान का महत्व भी समझाया। गांव पहाड़ी से आई पुत्रवधु का परिवार ने बेटी मानकर स्वागत किया।
समाज में प्रतिष्ठा और रूतबा दिखाने के उद्देश्य से महंगी शादियों की चर्चा तो आप आए दिन सुनते रहते हैं। समझदार और पढ़े-लिखे परिवारों में बिना दहेज की शादी का चलन भी चल पड़ा है। सनातन परंपरा में कन्यादान और गोदान का महत्व भी कम नहीं है।
रेवाड़ी के कोनसीवास रोड स्थित विजय नगर के बाबूलाल और उनकी पत्नी निर्मला यादव ने कन्या को लक्ष्मी और गो माता को संरक्षण देने की पहल करके नई मिसाल कायम की है। इस दंपती ने अपने इंजीनियर पुत्र यशु का विवाह गांव पहाड़ी निवासी अशोक कुमार की एमएसई पास पुत्री निकिता से किया है।
दूल्हा-दुल्हन ने दोनों परिवारों की आपसी सहमति से बिना दहेज शादी करने का प्रस्ताव रखा। परिवार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के साथ-साथ दहेज की बजाय गोशाला में दान करने का निर्णय लिया।
यशु के पिता स्वयं पूर्व नौसैनिक हैं और इन दिनों मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं। उनका मानना है कि जब लड़की स्वयं लक्ष्मी का रूप है तो दहेज लेकर बेटी काे बोझ क्यों माना जाए। दहेज के पैसों को यदि गो माता की सेवा में लगाया जाए तो कन्यादान और गोदान दोनों का पुण्य प्राप्त होगा।
उन्होंने तीन गायों और उनके संरक्षण के लिए अलग-अलग समितियों को एक लाख एक हजार रुपये का दान दिया। भारतीय गो रक्षक दल के प्रधान प्रदीप डागर, गो संरक्षण दल बावल एवं रेवाड़ी की रामतलाई उपचार शाला ने इस पहल का स्वागत किया है।
परिवार व समाज के साथ-साथ इष्ट मित्रों राजेश कौशिक, विजय कुमार आदि का कहना है कि इस शादी का यह संदेश है कि बेटी को लक्ष्मी मानकर ससुराल में मान दिया जाए तो किसी भी पिता के लिए बेटी बोझ नहीं होगा। यह स्वस्थ परंपरा समाज के लिए बहुत जरूरी है।