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Rewari News: पैर फ्रैक्चर होने के बाद चारपाई पर लेटकर किया अभ्यास

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रेवाड़ी। जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स-2026 में रेवाड़ी के सुलखा गांव निवासी कमलजीत और झज्जर की सुरुचि इंदर सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को दूसरा गोल्ड दिलाया।
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कमलजीत की इस उपलब्धि से सुलखा गांव और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी। कमलजीत के परिवार के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने चोट और आर्थिक परेशानियों के बावजूद निशानेबाजी में अपना मुकाम बनाया।

कमलजीत का शुरुआती रुझान शूटिंग की बजाय एथलेटिक्स की ओर था। वह धावक बनना चाहते थे। वर्ष 2022 में चोट लगने के बाद उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को अपना कॅरिअर बनाया। हालांकि, शूटिंग का प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में आने-जाने और अन्य खर्च परिवार के लिए आसान नहीं थे। इसके बावजूद माता-पिता और चाचा ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
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कमलजीत के चाचा दिनेश ने बताया कि वर्ष 2022 में रेवाड़ी में कोचिंग के लिए जाते समय गांव के बस स्टॉप से टेंपो में बैठने के बाद जैतड़ावास के पास टेंपो पलट गया था। हादसे में कमलजीत के पैर में फ्रैक्चर हो गया। उस समय करीब 20 दिन बाद उनका मैच था। चोट के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा। घर में चारपाई पर लेटे-लेटे दीवार पर टारगेट लगाकर अभ्यास किया। इसके बाद प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।

अंतिम समय में मिली मिक्स्ड टीम में जगह

एशियन गेम्स में कमलजीत को मिक्स्ड टीम में खेलने का मौका अंतिम समय में मिला। भारतीय टीम में पहले सुरुचि के साथ केडारलिंग की जोड़ी तय थी। व्यक्तिगत स्पर्धा में कमलजीत नौवें स्थान पर रहे थे और एक अंक से फाइनल में जगह नहीं बना सके थे। इसके बाद मिक्स्ड टीम के लिए जोड़ी में बदलाव किया गया और कमलजीत को सुरुचि के साथ उतारा गया। दोनों ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

28 अगस्त को सेना में बने हवलदार

कमलजीत के लिए सितंबर का यह महीना दोहरी खुशी लेकर आया है। इसी वर्ष 28 अगस्त को उनका भारतीय सेना में हवलदार पद पर चयन हुआ था। अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत की है।

परिवार में उनकी मां गृहिणी हैं जबकि पिता कंपनी में काम करते हैं। छोटा भाई सीजीएल की तैयारी कर रहा है। कमलजीत ने गांव के कोच शक्तिपाल और दिल्ली के कोच राकेश के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया।

2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में जीता था गोल्ड

कमलजीत ने 15 वर्ष की उम्र में शूटिंग शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में पहचान बनाई। वर्ष 2023 में उन्होंने आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल जूनियर पुरुष स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में भी अपनी पहचान बनाई और सीनियर स्तर पर जगह बनाई।

शूटिंग के सफर में आर्थिक परेशानियां भी सामने आईं। महंगे प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के खर्च के कारण एक समय उन्होंने खेल छोड़ने तक का विचार किया था। लेकिन माता-पिता और चाचा ने अपनी बचत खर्च कर उनका साथ दिया। गांव के कोच ने भी शुरुआती दौर में उन्हें तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

विश्व चैंपियनशिप पर भी नजर

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कमलजीत की नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है। उनका लक्ष्य विश्व स्तर पर भी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। परिवार और गांव के लोगों को उम्मीद है कि एशियन गेम्स की यह सफलता उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को नई ऊंचाई देगी।

माता-पिता ने कहा-बेटे की मेहनत पर हमें गर्व

कमलजीत के पिता रतीराम और माता राजबाला ने कहा कि बेटे ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत जारी रखी। चोट लगने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया। परिवार ने हमेशा उसका हौसला बढ़ाया। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का पल है। उन्होंने कहा कि कमलजीत ने अपनी मेहनत और लगन से परिवार, गांव और रेवाड़ी का नाम रोशन किया है।
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