संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सांस्कृतिक संस्था बंजारा की ओर से 3 अगस्त को माॅडल टाउन स्थित बाल भवन के ओपन थियेटर में प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर द्वारा लिखित नाटक चरणदास चोर का मंचन किया जाएगा। इस नाटक का निर्देशन रंगकर्मी विक्रान्त सैनी ने किया है।
बंजारा के प्रेस सचिव योगेश कौशिक के बताया कि यह नाटक हमारे नायक चोर चरणदास के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है, जो चोरी करने के बाद भी अपने मूल्य और सिद्धांतों पर अडिग रहता है। एक दिन चोरी करते हुए पुलिस से बचने के लिए वह एक गुरु के आश्रम में पहुंचता है।
वहां गुरु उसे चोरी छोड़ने की सलाह देते हैं, लेकिन चरणदास व्यंग्य में कहता है गुरुजी, मैं तो अंधेरे में चोरी करता हूं, लेकिन आप तो दिनदहाड़े लोगों के बीच चोरी करते हो। यह संवाद समाज की कुरीतियों और दोहरे मापदंडों पर तीखा कटाक्ष करता है।
गुरु के दबाव में आकर चरणदास उनसे गुरु दक्षिणा के रूप में चार वचन लेता है। वह कभी झूठ नहीं बोलेगा, कभी सोने की थाली में भोजन नहीं करेगा, वह रानी के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा और वह कभी राजगद्दी पर नहीं बैठेगा।
चरणदास को लगता है कि उसके जीवन में ये परिस्थितियां कभी आएंगी ही नहीं, इसलिए वह आश्वस्त होकर आश्रम से निकल पड़ता है लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर होता है।
घटनाएं ऐसे मोड़ लेती हैं जहां चरणदास को अपने वादों और प्रलोभनों के बीच संघर्ष करना पड़ता है। रानी स्वयं विवाह का प्रस्ताव देती हैं। उसे सोने की थाली में भोजन कराया जाता है और यहां तक कि राजगद्दी पर बैठने का आग्रह भी किया जाता है, लेकिन चरणदास अपने वचनों पर अडिग रहता है। उसकी सच्चाई, ईमानदारी और अडिगता समाज के खोखले नैतिकता की पोल खोल देती है।