रेवाड़ी। हाइपरटेंशन, बीपी और शुगर जैसी बीमारियां लोगों में तेजी से बढ़ रही हैं। बदलती जीवन शैली इन बीमारियों का बड़ा कारण बनकर उभरी हैं। अब गर्मी बढ़ने पर भी यह बीमारियां और अनियंत्रित हो जाती हैं। गर्मी के बढ़ने पर इन बीमारियों पर कंट्रोल करने के लिए आयुर्वेद में भी उपाय सुझाए गए हैं। इन बीमारियों के लिए 5 आसन प्राणायाम सहायक है। आयुष में सुझाए 5 प्राणायामों से इन बीमारियों पर कंट्रोल कर सकते हैं।
योग एक्सपर्ट एवं नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार और योगाचार्य युद्धवीर सिंह ने बीमारियों को दूर करने में इन आसन-प्राणायाम का खास महत्व बताया है। इन आसनों में भ्रामरी प्राणायाम, नाड़ी शोधन श्वांस, शीतली सांस, उज्जायी श्वांस जैसे प्राणायाम मस्तिष्क के लिए सर्वोत्तम है। यह आसन दिमाग को शांत करते हैं और तनाव को कम करने में सहायक हैं।
भ्रामरी प्राणायाम : ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।
प्राणायाम के करने से मन शांत होता है। तनाव और चिंता से राहत देने के साथ ही स्वर तंत्र मजबूत करता है। गले की परेशानी और ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है। एकाग्रता में भी सुधार आता है। इस प्राणायाम का अभ्यास खाली पेट या भोजन के कम से कम चार से 5 घंटे बाद करना चाहिए। प्राणायाम सुबह जल्दी करना सबसे अच्छा है, खासकर सूर्योदय से पहले।
शीतली प्राणायाम : शरीर के तापमान लेवल को करता है नियंत्रित
शरीर को ठंडा करती है। शरीर में नमी दौड़ती है और पित्त के असंतुलन को दूर करती है। इस व्यायाम को हमेशा गर्मियों के दिनों में ही करना चाहिए। यह प्राणायाम दिमाग और शरीर को ठंडा रखता है। तनाव और चिंता को दूर भगाता है। डिप्रेशन को दूर करने में रामबाण की तरह काम पड़ता है। गले की बीमारी और क्रोध पर नियंत्रण के लिए अच्छा है। भूख, प्यास और रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है।
अनुलोम-विलोम : फेफड़े होते हैं मजबूत
व्यायाम के करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। सर्दी-जुकाम, दमा की शिकायतों से काफी हद तक बचाव होता है। हृदय स्वस्थ रहता है। गठिया के लिए भी फायदेमंद है। मांसपेशियों की प्रणाली में सुधार करने और पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है। तनाव और चिंता को कम करता है। साथ ही पूरे शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है।
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चंद्रभेदन प्राणायाम : शीतलता का प्रतीक
आयुर्वेद के अनुसार यह चंद्र नाड़ी है। चंद्र यानी शीतलता का प्रतीक होता है। इस नासाछिद्र के माध्यम से ही बढ़े हुए ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण किया जा सकता है। चंद्र भेदन प्राणायाम दिन में किसी भी समय खाली पेट किया जा सकता है।
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बटरफ्लाई योगासन : घुटनों में दर्द से दिलाता है राहत
योग विशेषज्ञ के अनुसार महिला और पुरुष दोनों को यह आसन करना चाहिए। तितली आसन करने से अंदरूनी मांस पेशियां मजबूत बनी रहती है। इस आसन को करने से जांघों की मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव से राहत मिलती है। साथ ही घुटनों में होने वाले दर्द से भी राहत दिलाने में मददगार है।