रेवाड़ी। जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से फरवरी-मार्च में होने वाली शहर की कुल 457 किमी. लंबी सीवर लाइन की छटाई अटक गई है। सीवर की सफाई नहीं होने के चलते बारिश में शहर की निचली कॉलोनियों में जलभराव हो सकता है। इसी को देखते हुए लापरवाही की शिकायत विभाग के पोर्टल से लेकर सीएम तक भेजी गई है। बता दें बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा जलभराव की शिकायत वार्ड-23 के कंपनी बाग, इंद्रकॉलोनी, दुर्गाकॉलोनी व मॉडल टाऊन सहित 15 कॉलोनियों में सबसे ज्यादा रहती है।
आमतौर पर बारिश से पहले सीवर सफाई के लिए फरवरी में ही करीब 20 लाख रुपये का टेंडर देकर सफाई कराई जाती है। लेकिन अधिकारी ये टेंडर नहीं कर पाए। अब सीवर सफाई का कार्य ज्यादा गर्मी में नहीं हो पाता है, ऐसे में ये कार्य फरवरी से मार्च तक पूरा कर लिया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, अब इसका खामियाजा शहर के 31 वार्डों के करीब दो लाख लोगों को उठाना पड़ सकता है।
पार्षद का आरोप : तीन माह से अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई
भाजपा जिला उपाध्यक्ष शहर के वार्ड-23 के पार्षद भूपेंद्र गुप्ता ने सीएम को भेजी शिकायत में कहा कि बीते तीन माह से लगातार जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को शिकायत दी जा रही है, बावजूद इसके कोई संज्ञान नहीं लिया गया। बीते कुछ दिनों पहले हुई बारिश के दौरान भी कंपनी बाग में पानी भर गया था। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, नगर परिषद हाउस गठन की पहली बैठक में शहर में सीवर ओवर फ्लो का मुद्दा अधिकतर पार्षदों ने उठाया था।
अमरुत योजना के तहत 66 करोड़ मिले समाधान नहीं
शहर में सीवर व पानी की समस्या के समाधान के लिए अमरुत योजना के तहत रेवाड़ी शहर को करीब 66 लाख रुपये की राशि मिली थी। 31 मार्च को योजना की समयसीमा खत्म हो चुकी है, हालांकि इसको आगे बढ़ाने को लेकर भी बात चल रही है। लेकिन सवाल है कि महज सीवर लाइन के लिए 33 करोड़ मिलने के बाद भी शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया है।
शहर में नहीं बदली जा सकी पुरानी सीवर लाइन
अमरुत योजना के तहत शहर की पुरानी सीवर लाइन व बाहरी कॉलोनियों में नई लाइन डालने के लिए राशि केंद्र सरकार की ओर से दी गई थी। शहर में सीवर व पेयजल का काम जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है, लेकिन पूरी राशि से काम कराने का जिम्मा नगर परिषद को दे दिया गया। इसके चलते शहर में 45 साल पुरानी सीवर लाइन ही नहीं बदली गई। इसके चलते भी शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। यदि यहीं कार्य जन स्वास्थ्य विभाग से कराया जाता तो परिणाम बेहतर की उम्मीद की जा सकती थी।
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अनेक बार सफाई के लिए शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अब बारिश के दिनों में शहरवासियों को उठाना पड़ सकता है। बारिश के दिनों में जलभराव घरों तक में हो जाता है।
-भूपेंद्र गुप्ता, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पार्षद वार्ड-23
मार्च के बाद एस्टीमेट पास हुए हैं, सीवर सफाई के लिए बुधवार से ही काम शुरू कर दिया गया है। अब जल्दी पूरी टीम को लगाकर शहर के सभी सीवर को साफ करा दिया जाएगा।
- अशोक कुमार, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग