रेवाड़ी। बारिश के कारण मच्छर जनित बीमारी डेंगू का खतरा बढ़ता जा रहा है। 137 स्थानों पर लार्वा मिलने के बावजूद नगर परिषद की ओर से अभी तक फॉगिंग शुरू नहीं की जा सकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दौरान लार्वा मिलने पर 137 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। लार्वा मिलने के चलते अब कभी भी एडीज मच्छर की चपेट में लोग आ सकते हैं। लेकिन शहर हो या गांव डेंगू की रोकथाम के लिए बहुत ही कम फॉगिंग मशीनें हैं। इस साल भी समय रहते मशीनों का इंतजाम नहीं किया गया।
बता दें कि शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग का जिम्मा नगर निकाय पर होता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को फॉगिंग करानी होती हैै। प्रदेश सरकार की ओर से चार साल पहले पंचायतों को फॉगिंग मशीन खरीदने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आज तक कुछ पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर पंचायतों में फॉगिंग मशीन नहीं है।
358 में से महज 88 पंचायतों के पास अपनी फॉगिंग मशीन
सरकार की ओर से जिला प्रशासन को एक पत्र भेजा गया था। इसमें जिले के गांवों में उपलब्ध फॉगिंग मशीनों के बारे में जानकारी मांगी गई थी। तब सरकार की ओर से संकेत दिए गए थे कि वह खुद ही फॉगिंग मशीन खरीदकर पंचायतों को सौंप देगी। लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ। न तो सरकार ने फॉगिंग मशीनें खरीद कर पंचायतों को दीं। न ही यह आदेश दिए कि पंचायतें अपने स्तर पर पंचायती फंड से फॉगिंग मशीनें खरीद लें। जानकारी के अनुसार 358 में से महज 88 ग्राम पंचायतों के पास अपनी फॉगिंग मशीन हैं। जिनसे से आसपास कुछ ही गांवों को कवर किया जा सकता है। इसके चलते अब गांवों के निवासियों के लिए गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग कर रहा मास फीवर सर्वे
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार करीब 12 टीमों की ओर से जिला के सभी तालाबों में गंबूजिया फीस छोड़ी गई है। इसके अलावा गंदे पानी के जोहड़ में काला तेल डाला जा रहा है। इसके अलावा मास फीवर सर्वे कर डेंगू के मरीजों को तलाशा जा रहा है। वहीं 137 स्थानों पर लार्वा मिलने के बाद नोटिस भी दिए गए हैं। यदि दोबारा जांच में छतों के ऊपर टायर व अन्य बर्तनों में पानी रुका हुआ मिला तो चालान की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में लोगों को रुके हुए पानी को साफ करना चाहिए, वहीं सप्ताह में एक बार जरूर कूलर का पानी निकालकर उसको सुखाना चाहिए।
डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास स्प्रे के लिए दवा उपलब्ध है। ऐसे में नगर परिषद को शहर में फॉगिंग करानी चाहिए। शहर में नगर परिषद व ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग का जिम्मा पंचायतों के पास है। जहां पर भी ज्यादा मच्छर हैं, वहां पर फॉगिंग जरूरी है।