पानीपत। नगर निगम की 1180 गज जमीन को अपना बताकर आवंटित कर देने का वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाया गया है। इस जमीन पर करीब 30 दुकानें हैं, जिनका किराया वक्फ बोर्ड वसूलता है। दूसरी ओर वक्फ बोर्ड के एस्टेट ऑफिसर का दावा है कि जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज उनके पास है। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
आरोप लगाने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर का कहना है कि जीटी रोड के लगती रेलवे रोड के कट और गीता मंदिर रोड पर खसरा नंबर 3605 की 1180 वर्ग गज व्यावसायिक भूमि नगर निगम की है। इस जमीन को वक्फ बोर्ड ने दो दर्जन दुकानदारों को किरायानामे पर आवंटित किया हुआ है। राजस्व रिकॉर्ड में इस भूमि की मलकियत गांव शामलात के नाम है। इसका मालिक नगर निगम है। उन्होंने कहा कि वर्क्फ बोर्ड में आरटीआई लगाई थी। खसरा नंबर 3605 तरफ इंसार की भूमि में आवंटित दुकानों के आवंटन पत्र की प्रतियां और वक्फ बोर्ड के नाम इस भूमि की मलकियत होने का राजस्व रिकॉर्ड मांगा था। वक्फ बोर्ड के एस्टेट ऑफिसर मोइनुद्दीन काजी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।
यह मामला सूचना आयोग पहुंचा तो मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल की ओर से 26 अगस्त 2021 को दिए आदेशों के बावजूद एस्टेट ऑफिसर ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। केंद्र सरकार के एक गजट नोटिफिकेशन की प्रति देकर पल्ला झाड़ लिया और इस कॉपी पर कैंसल लिखकर कहा कि इसे कोर्ट में शामिल नहीं कर सकते हैं। अब राज्य सूचना आयोग ने एस्टेट ऑफिसर मोइनुद्दीन काजी को शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 15 दिन में समस्त सूचना शिकायतकर्ता को देने और 24 फरवरी को चंडीगढ़ में जवाब सहित पेश होने के आदेश दिए हैं।
जमीन वक्फ की, हमारे पास सभी सबूत
ये जमीन वक्फ बोर्ड की है। इसके सभी सबूत और दस्तावेज हमारे पास हैं। राजस्व रिकार्ड के अनुसार भी यह जमीन वक्फ बोर्ड की है। एक साजिश के तहत वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाए जा रहे हैँ। इसका जवाब हम देंगे और कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। - मोइनुद्दीन काजी, ईओ, वक्फ बोर्ड, पानीपत