पानीपत। शहर में संदिग्ध बुखार और प्लेटलेट्स की कमी से तीन बच्चों की मौत हो गई। दो बच्चों की मौत शुक्रवार सुबह और एक बच्चे की मौत वीरवार को हुई। तीनों ही बच्चे बुखार से ग्रस्त थे। परिजनों ने इन्हें सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था, लेकिन मौत के बाद बिना पोस्टमार्टम कराए शवों को ले गए। विदित हो कि संदिग्ध बुखार से इस माह कुल तीन बच्चों समेत पांच की मौत हो चुकी है।
मूल रूप से बिहार के सिवान जिले का रहने वाला वीरू कुमार (17) पुत्र विरेंद्र कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन इसे तीन दिन पहले सिविल अस्पताल में लेकर आए थे। उपचार के दौरान वीरवार को सिविल अस्पताल में विरेंद्र की मौत हो गई। वहीं भैंसवाल मोड़ निवासी रूबी (07) पुत्री इस्लाम पिछले तीन दिन से बीमार थी। परिजनों ने निजी अस्पताल में उसका इलाज कराया लेकिन आराम नहीं हुआ। बृहस्पतिवार शाम को परिजन उसे सिविल अस्पताल में लेकर आए, जहां उपचार के दौरान शुक्रवार सुबह रूबी की मौत हो गई। इसके अलावा खुशी (11) पुत्री बिट्टू निवासी नांगलखेड़ी को भी कई दिन से बुखार था और लगातार प्लेटलेट्स गिर रही थी। शुक्रवार को इलाज के दौरान सिविल अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों के अनुसार इस सीजन में डेंगू का खतरा अधिक बढ़ जाता है और वायरल फीवर भी गंभीर रूप धारण कर लेता है। ऐसे में प्लेटलेट्स तेजी से गिरने और समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत हो सकती है। डॉक्टरों ने लोगों से बुखार होने पर लापरवाही न करने और चिकित्सकीय जांच कराकर परामर्श लेने की अपील की है।
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शहर के 130 अस्पतालों की ओपीडी आठ हजार से अधिक
फिलहाल शहरवासी वायरल फीवर की चपेट में हैं। हर घर में बुखार के रोगी हैं। शहर के 130 निजी अस्पतालों में प्रतिदिन की ओपीडी आठ हजार से अधिक है। सिविल अस्पताल में हर रोज बुखार खांसी और जुकाम की ओपीडी 300 से अधिक है। हर रोज सिविल अस्पताल में 40-50 डेंगू के टेस्ट हो रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू के 169 कंफर्म केस हो चुके हैं।
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बुखार से हुई बच्चों की मौत : डॉ. जसमीन
बच्चों को सिविल अस्पताल लाया गया था। वे बुखार से ग्रस्त थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन अपनी मर्जी से बिना पोस्टमार्टम कराए शवों को ले गए।
- डॉ. जसमीन कौर, फिजिशयन एवं ड्यूटी डॉक्टर इमरजेंसी वार्ड, सिविल अस्पताल