पानीपत। अमर उजाला में प्रकाशित खबर।
- फोटो : Panipat
पानीपत। नगर निगम का स्ट्रीट लाइट प्रकरण एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गया है। एक बार फिर से पुरानी लाइटों को ठीक करने के लिए निगम ने खर्च को चार गुना बढ़ा दिया है। निगम अधिकारियों ने इन लाइटों की मरम्मत और रखरखाव के खर्च का पांच लाख रुपये एस्टीमेट बनाया था, जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है। इससे पहले भी निगम की एक रिपोर्ट के अनुसार पुरानी लाइटों को ठीक करवाने पर निगम हर माह करीब 10 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च कर रहा है।
बावजूद इसके इतनी बड़ी इन्हांसमेंट से निगम फिर से सुर्खियों में आ गया है। हालांकि निगम अधिकारियों का तर्क है कि निगम के टेंडर के पोर्टल मेें दिक्कत है। इसलिए नए टेंडर नहीं लग पा रहे हैं। इसे लेकर पुराने ठेकेदार से पहले के रेट पर ही सामान मंगवाया जा रहा है।
बता दें कि ‘अमर उजाला’ ने अपने 4 फरवरी के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें निगम की ओर से स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च समेत इससे होने वाले वित्तीय नुकसान को उजागर किया गया था लेकिन इस प्रकरण पर कोई जांच या कार्रवाई होने की बजाए अधिकारी इन्हांस कर माल खरीद रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर न लगने की सूरत में सामान तो खरीदना पड़ेगा ही।
सालाना इतना हो रहा ज्यादा खर्च
एक रिपोर्ट के अनुसार, निगम 17 हजार पुरानी लाइटों की मरम्मत और रखरखाव पर सालाना करोड़ों रुपये ज्यादा खर्च कर रहा है। इसके लिए निगम हर साल मैटेरियल खरीद के लिए 60 से 70 लाख रुपये खर्च कर रहा है। कुल मिलाकर एक साल में 17000 लाइटों की रिपेयर और मेंटेनेंस पर पौने दो करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं जबकि इससे पहले ये काम प्रति प्वॉइंट टेंडर के हिसाब से किया जाता रहा है। इसमें 17000 स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का सालाना खर्च करीब 90 लाख रुपये था, जो अब दोगुना हो चुका है।