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कल मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि, भोले को करवाएंगे जलाभिषेक

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सावन में सोमवार के साथ-साथ मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। शिव कृपा दिलाने वाली सावन शिवरात्रि का पर्व 6 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इस बार कोरोना महामारी के कारण कांवड़ यात्रा पर रोक लगाए जाने से कांवड़ियों की कांवड़ लाने की तमन्ना मन में ही रह गई, लेकिन शिव भक्त अपने पास के शिवालयों में जलाभिषेक कर शिवरात्रि मनाएंगे। हालांकि मंदिरों में पूजा के दौरान उन्हें कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
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अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित दाउजी महाराज ने बताया कि हिंदू पंचाग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहते हैं। सावन शिवरात्रि श्रावण माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन की शिवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें व्रत रखने वालों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मनोवांछित फल पाने के लिए यह व्रत अति पावन है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख शांति बनाए रखने के लिए भी व्रत लाभकारी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन अपनी राशि के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक करने से भोले बाबा शीघ्र प्रसन्न होकर जातकों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं व सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस उपाय से जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह दोष भी दूर होते हैं।
शिवरात्रि पर मंदिरों में होगी शिव परिवार की पूजा
सावन शिवरात्रि के दिन शिव परिवार की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत, उपवास, मंत्र जाप तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ मां गौरी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सावन शिवरात्रि का दिन अत्यंत पावन होता है। इस अवसर पर शिव जी को बेलपत्र, गंगाजल, गाय का दूध, भांग, मदार, शमीपत्र, सफेद चंदन, सफेद पुष्प आदि अर्पित करना उत्तम रहता है। माता पार्वती की पूजा करते समय उनको अक्षत, पुष्प, फल, धूप आदि के साथ सुहाग की सामग्री चढ़ानी चाहिए।
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शुभ मानी गई है भोलेनाथ की पूजा
पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि भोलेनाथ की पूजा निशिता काल में शुभ मानी गई है। निशिता काल में भगवान शिव की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है और भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं। पंचांग के अनुसार सावन मास की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 6 अगस्त दिन शुक्रवार शाम को 06 बजकर 28 मिनट से होगा और चतुर्दशी की तिथि का समापन 7 अगस्त को शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। शिवरात्रि पूजा अवधि केवल 43 मिनट तक (निशिता काल पूजा का समय देर रात 12 बजकर 06 मिनट से देर रात 12 बजकर 48 मिनट तक है) रहेगा। वहीं, शिवरात्रि व्रत पारण समय शनिवार 7 अगस्त की सुबह 5 बजकर 46 मिनट से दोपहर 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। व्रत का पारण नियम पूर्वक करना चाहिए और इसके बाद दान आदि का कार्य भी करना चाहिए।
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