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फैक्टरी बंद कर रात में जला रहे प्रतिबंधित ईंधन

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पानीपत। सेकटर-29 पार्ट-1 स्थित फैक्टरी में से निकलती हुआ धुआं। - फोटो : Panipat
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पानीपत। अब जिले की वायु में धूल के कणों के साथ ही जहरीले धुएं की मात्रा भी अधिक हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी की वजह उद्योगों से निकलने वाला जहरीला धुआं बन रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती पर उद्योगों ने तोड़ निकाला और अब रात में कचरा जलाया जा रहा है। बॉयलर में ईंधन के तौर पर कचरे का इस्तेमाल रात 11 से सुबह छह बजे तक हो रहा है।
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जाटल रोड, सनौली रोड, गोहाना रोड, कुटानी रोड और काबड़ी रोड पर स्थित फैक्टरियों में ईंधन के तौर पर कचरा जाया जा रहा है। ये फैक्टरियां भी अवैध रूप से चल रहीं हैं। प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग करने वालों पर डायर्स एसोसिएशन ने भी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि शनिवार को पानीपत का एक्यूआई 122 अंक गिरा और 190 अंक दर्ज किया गया है। माना जा रहा है कि दिवाली पर जिले की हवा अत्यधिक जहरीली हो सकती है। इसलिए ईपीसीए ने प्रशासन को ग्रैप के तहत सख्ती से काम करने के निर्देश दिए हैं।
300 करोड़ का जुर्माना लगा , फिर भी नहीं सुधरे
पानीपत के प्रदूषण को नियंत्रित करने व लोगों को प्रदूषण मुक्त जीवन देने के एनजीटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तमाम प्रयास किए हैं। एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने वाली रेड और ऑरेंज जोन की 150 से अधिक फैक्टरियों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया। वायु प्रदूषण करने वाली और अवैध रूप से चलने वाली 90 फैक्टरियों को पिछले दो साल में बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं बोर्ड ने 170 फैक्टरियों को कारण बताओ नोटिस भी दिया, फिर भी प्रदूषण पर लगाम नहीं लग पा रही। अब कुछ उद्योगपति रात को फैक्टरियों में कचरा-जूते-चप्पल, फटे पुराने कपड़े व प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग कर रहे हैं।
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कोयले के प्रयोग से बढ़ जाता है खर्च
उद्यमी एक रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से कचरा खरीदते हैं। इनमें फटे पुराने कपड़े, चप्पल जूते, प्लास्टिक होता है। एक दिन फैक्टरी चलाने पर इनका खर्च अधिकतम 5 हजार रुपये तक आता है, जबकि नियमानुसार कोयले का प्रयोग करने पर एक फैक्टरी का एक दिन का खर्च कम से कम 30 हजार से एक लाख तक आता है।
सुबह फैक्टरी होती है सील, रात को खुल जाती है
सेक्टर-29 पार्ट टू के उद्यमियों ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर राजनेताओं का दबाव रहता है। बोर्ड सुबह फैक्टरी को सील करता है तो उद्यमी रात को सील तोड़ देते हैं। रात भर प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैक्टरी को सील करता है, बिजली निगम कनेक्शन नहीं काटता, शाम तक दोबारा फैक्टरी में काम शुरू हो जाता है।
ग्रैप के तहत विभाग काम कर रहा है: आरओ
अवैध रूप से चलने वाली व प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली फैक्टरियों पर लगातार कार्रवाई चल रही है। उनको सील भी किया जा रहा है। बिजली निगम को उनके कनेक्शन काटने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। ग्रैप के तहत विभाग काम कर रहा है।
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-कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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