पानीपत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय का जिले भर के किसानों समेत राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। जनप्रतिनिधियों एवं नेताओं ने सरकार से एमएसपी पर कानून बनाने के साथ ही आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को शहीद का दर्जा देने और उनके आश्रितों को नौकरी देने की मांग भी की। हालांकि इस दौरान भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने कोई प्रतिक्रिया देने से किनारा कर लिया। सांसद संजय भाटिया, शहरी विधायक प्रमोद विज और ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
किसानों के हौसले एवं संयम की हुई जीत
ये किसानों की सबसे बड़ी जीत है। सरकार ने किसानों पर काफी अत्याचार किया हैं। लाठीचार्ज से लेकर पानी की बौछारों तक से किसानों को गुजरना पड़ा है। इसके बाद भी प्रदेश के 36 बिरादरी के किसान एकजुट रहे और बड़े संयम और सहनशीलता के साथ आंदोलन जारी रखा। मैं आंदोलनरत सभी किसानों के हौसले की तारीफ करते हुए सरकार से मांग करता हूं कि जिन किसानों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसे वापस लिया जाए। आंदोलन में दिवंगत हुए किसानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए। - बलबीर वाल्मीकि, कांग्रेस विधायक, हलका इसराना
देर आए, लेकिन दुरुस्त आए
किसानों ने सत्याग्रह आंदोलन से जीत हासिल करके उदाहरण पेश किया है कि गांधीवादी विचारों से ही जीत हासिल की जा सकती है। देर आए, लेकिन दुुरुस्त आए। इस फैसले का स्वागत है। अब मांग है कि आंदोलन में शहीद हुए किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके परिवारों से माफी मांगी जाए। कृषि व्यवस्था को कॉरपोरेट घरानों के हाथों से बचाने के लिए इस ऐतिहासिक आंदोलन को करने वाले किसानों को आंतकवादी कहने वाले लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। एमएसपी पर जल्द से जल्द कानून बनाना चाहिए। - धर्म सिंह छौक्कर, कांग्रेस विधायक, हलका समालखा
आम आदमी और किसानों को राहत
प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया है। जो आम आदमी और किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है। इससे किसान तो धरनारत थे ही आम आदमी भी परेशान था। इससे किसान भी खुश हैं और अब धरने से उठकर अपने घरों को जा सकते हैं। एमएसपी पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इसके लिए एक कमेटी बनाएंगे। हालांकि प्रदेश सरकार पहले से ही 11 फसलों पर एमएसपी दे रही है। सरकार के इस फैसले का जननायक जनता पार्टी स्वागत करती है। - देवेंद्र कादियान, प्रदेश सचिव, जजपा
चुनाव में हार से डरी सरकार झुकी
तीनों कृषि कानून वापस लेने से किसानों की जीत हुई है। सरकार को हर मोर्चे पर मुंह तोड़ जवाब मिल रहा था। आगामी चुनाव में भी हार के डर से डरी हुई इस सरकार को किसानों के सामने झुकना पड़ा। हिंदुस्तान का किसान हर मोर्चे पर डटा रहा। इनेलो सुप्रीमो औमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला ने भी आंदोलन में किसानों का पूरा साथ दिया। यहां तक की अभय सिंह चौटाला ने तो इस्तीफा तक दे दिया था, लेकिन उपचुनाव में एक बार फिर से जनता ने उन्हें विजयी बनाया है। इनेलो किसानों के साथ खड़ी है। संयुक्त किसान मोर्चे के हर फैसले हर रणनीति पर इनेलो का समर्थन रहा है। - रणबीर देशवाल, जिला अध्यक्ष, व्यापार प्रकोष्ठ, इनेलो
किसानों की जीत, एमएसपी कानून बनाए सरकार
एक लंबे अरसे के संघर्ष के बाद अंत में किसानों की जीत हुई है। ये किसानों की बहुत बड़ी कामयाबी है। इसके लिए देश भर के किसान बधाई के पात्र हैं, जो सैकड़ों मुश्किलों के बाद भी बॉर्डर पर डटे रहे। किसानों को तो इन कानूनों की जरूरत ही नहीं थी। ये तो जबरदस्ती थोपे गए थे। किसानों को जरूरत है एमएसपी की। सरकार को अगर कानून बनाना है तो एमएसपी पर कानून बनाए। इस लंबे संघर्ष में जो किसान शहीद हुए हैं सरकार को उन्हें शहीद का दर्जा देना चाहिए। उनके परिवार को सरकारी नौकरी देनी चाहिए। - सुखबीर मलिक, जिला अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी