नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ऑक्सीजन प्लांट एक माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग को सौंप चुका है। विभाग तैयार बैठा है, लेकिन प्लांट का परीक्षण नहीं हो पा रहा है। अब तक सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का परीक्षण तीन बार टल चुका है। इसके जिम्मेदार एलएंडटी के इंजीनियर हैं। एक महीने से इनका इंतजार किया जा रहा है, लेकिन महामारी से लोगों को बचाने की जिम्मेदारी कंपनी के इंजीनियर पूरी नहीं कर रहे हैं।
पीएम केयर फंड से एनएचएआई ने सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट तैयार किया है। एक माह बीत चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को यही नहीं पता है कि यह प्लांट काम करता भी या नहीं। परीक्षण ने होने के कारण प्लांट में बनने वाली ऑक्सीजन की गुणवत्ता का भी पता नहीं लगाया जा सका है। ऐसे में प्रशासन की कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो बार एलएंडटी को परीक्षण करने और ऑक्सीजन की सैंपलिंग के लिए पत्र लिखा जा चुका है। एलएंडटी की ओर से इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है। सिविल सर्जन की ओर से प्लांट की रिपोर्ट मुख्यालय में समय समय पर भेजी जा रही है। अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया का कहना है कि परीक्षण के दौरान एलएंडटी के इंजीनियरों की देखरेख में ही परीक्षण होगा।
140 से 150 बेड पर होगी ऑक्सीजन की आपूर्ति
ऑक्सीजन प्लांट से निकलने वाली ऑक्सीजन का सेचुरेशन लेवल दो बार जांचा जा चुका है। पहली बार में 93 और दूसरी बार में सेचुरेशन लेवल 96 मिला है। ऑक्सीजन गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल गुरुग्राम स्थित एक लैब में भेजा जाएगा। अस्पताल के इस नए प्लांट से हवा से 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन तैयार होगी। 140-150 बेड को 24 घंटे आपूर्ति की जा सकेगी।
हवा से इस तरह बनेगी ऑक्सीजन
प्लांट के माध्यम से वातावरण से हवा को कंप्रेस किया जाता है। फिल्टर की मदद से इसे शुद्ध कर ठंडा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में हवा में मौजूद ऑक्सीजन लिक्विड में तब्दील हो जाती है। इसे स्टोर किया जाता है। यही मेडिकल ऑक्सीजन है। कुछ प्लांट लिक्विड में तो कुछ गैस के रूप में ऑक्सीजन तैयार करते हैं। ऑक्सीजन हवा और पानी दोनों में मौजूद होती है। हवा में 21 फीसदी ऑक्सीजन, 78 फीसदी नाइट्रोजन और एक फीसदी अन्य गैसें होती हैं।
एलएंडटी से लगातार संपर्क में हैं : डॉ. ग्रोवर
ऑक्सीजन प्लांट को सेवा में लाने से पहले ऑक्सीजन की गुणवत्ता की जांच होगी। इसके लिए सैंपल भेजे जाएंगे। प्लांट का परीक्षण होना है। इसके लिए लगातार एलएंडटी से संपर्क किया जा रहा है। प्रयास है कि जल्द प्लांट का परीक्षण हो।
-डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल