Neeraj celebrated Dussehra festival at his home, remembered moments of struggle with senior and coach
- फोटो : Panipat
पानीपत। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज ने दो साल बाद अपने घर पर आकर दशहरा का पर्व मनाया है। गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा तीसरी बार अपने गांव में आए और इस बार सबसे ज्यादा दिन रहकर गए है। नीरज दशहरा से दो दिन पहले अपने गांव में आ गए थे, और अपने गांव के स्कूल ग्राउंड में खिलाड़ियों को भाला फेंक का अभ्यास करवाया। यहां पर नीरज चोपड़ा ने अपने सीनियर के साथ संघर्ष के पलों को याद किया। दुबई में स्काई डाइविंग करने के बाद ही नीरज चोपड़ा अपने माता पिता के साथ दशहरा का पर्व मनाने के लिए तीन दिन पहले आ गए थे। इस मौके पर इनके सीनियर मनीष तराड़, मंजीत, संदीप, धर्मेेंद्र, आयुष, लक्खा, सोनू, संजय, मोनू भी नीरज के घर पहुंचे। सभी ने भोजन एक साथ किया।
रात को कोच व सीनियर के साथ किए संघर्ष के पल याद
रात को नीरज चोपड़ा ने अपने सीनियर व कोच जितेंद्र जागलान को घर पर आमंत्रित किया और उनके साथ समय बिताया। सीनियर शुरुआती संघर्ष के बारे में बातचीत हुई। नीरज ने बताया कि किस तरह वह शुरुआती दौर में समय पर स्टेडियम नहीं पहुंच पाते थे और जब ज्यादा देर अभ्यास कर लें या फिर रात को बस न मिले तो वह स्टेडियम में ही सो जाते थे तब उनके चाचा सुरेंद्र उनको ड्यूटी से आते हुए घर लेकर जाते थे। नीरज ने बताया कि शुरुआत में ट्रेनिंग के दौरान काफी दर्द सहन करना पड़ता था लेकिन वह किसी को बताए बिना अगले दिन भी अभ्यास करते थे।